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Posts published in “Broiler Breeder Tips In Hindi.”

Dr Manoj Shukla Views about India Poultry.

विषय:-भारतीय कृषि में पोल्ट्री उद्योग की भूमिका।
सन्दर्भ:- भारतीय कृषकों की आय दोगुनी करने की आपकी विचारधारा एवं 19-20 फरवरी को इसी संदर्भ में दिल्ली की कार्यशाला।

माननीय प्रधानमंत्री जी,हम समस्त भारतवासी इस सारगर्भित सत्य से भलीभांति परिचित हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है।कृषक के जीवन में कृषि के साथ ही उसको सहयोग प्रदान करते हुए चलता है पशुपालन, और आज पशुपालन के क्षेत्र में पोल्ट्री फार्मिंग ने एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।यदि हम भारतीय  पशुपालन पर नजर डालें तो पाएंगे कि पोल्ट्री व्यवसाय ही एक ऐसा व्यवसाय रहा है जो अन्य पशुपालन व्यवसायों की तुलना में,विगत वर्षों में तीव्र गति से बढ़ा है और आज भी बढ़ रहा है।किंतु आज इस व्यवसाय को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और यदि समय रहते इन परेशानियों का समाधान नहीं हो पाया तो भारतीय कृषक इस व्यवसाय को बंद करते चले जायेंगे।कालांतर में बंद होता यह व्यवसाय कृषकों की आमदनी भी कम कर देगा।मैं आपका ध्यान कुछ मुख्य बिंदुओं पर आकर्षित करना चाहूँगा…

१- कृषकों नें जब अपना पोल्ट्री फार्म अपनी कृषि भूमि पर बनाया तब ये सभी फार्म शहरी तथा ग्रामीण आबादियों से दूर उनके खेतों में थे।ये समस्त फार्म ग्रामपंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर बनाये गए थे।किंतु धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ी और भूमाफियाओं नें आसपास की कृषि भूमि खरीदकर उसे आवासीय भूमि में डायवर्सन करवाकर वहाँ रहवासी कालोनियां बनानी शुरू कर दीं।अब ये भूमाफिया तथा इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग इन पोल्ट्री किसानों पर,प्रदूषण को मुद्दा बनाकर विभिन्न माध्यमों से दबाव बनाते हैं कि फार्म बंद कर दो,ऐसे कई प्रकरण न्यायालयों में भी विचाराधीन हैं।महत्वपूर्ण बात यह है कि आज यह पोल्ट्री व्यवसाय उस किसान तथा उसके आश्रित परिवार के जीविकोपार्जन का मुख्य स्रोत है, इसे वह कैसे बन्द कर दे…?जबकि उसनें पशुपालन के अंतर्गत आने वाले समस्त नियमों का पालन करते हुए अपना पोल्ट्री फार्म खोला था।आज उससे पूछा जाता है कि…
*तुमनें पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु अपनी कृषि भूमि का व्यवसायिक भूमि में डायवर्सन करवाया है कि नहीं…? जबकि नियम तो यह है कि पोल्ट्री व्यवसाय कृषि-सह कार्य (Allied Agriculture) के अंतर्गत आता है और उसके लिए कृषि भूमि का व्यवसायिक भूमि में डायवर्सन करवाना आवश्यक ही नहीं है।
*तुमनें अपना पोल्ट्री फार्म खोलने से पहले “ग्राम तथा नगर निवेश” से अनुमति ली थी कि नहीं…? जबकि जब ये फार्म खुले थे तब ये शहरी आबादी तथा नगर निगम क्षेत्रों से बाहर थे,और नियम यह है कि 1लाख मुर्गियों से कम क्षमता का पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु किसी से अनुमति की आवश्यकता ही नहीं है।
*तुमनें अपना पोल्ट्री फार्म खोलने से पहले प्रदूषण विभाग से अनुमति ली थी कि नहीं…? जबकि यहाँ भी यही नियम है कि पोल्ट्री व्यवसाय एक कृषि सह-कार्य है जिससे वातारण को कोई नुकसान नहीं होता है तथा 1लाख मुर्गियों से कम क्षमता वाले पोल्ट्री फार्मों को इसकी आवश्यकता ही नहीं है।
महोदय, अब मैं आपसे एक प्रश्न करना चाहता हूँ, कि जिस तरह अपनी कृषि भूमि पर अपना पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु ग्रामपंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है,ठीक उसी तरह किसी पोल्ट्री फार्म के आसपास रहवासी कॉलोनी बनाने से पहले स्थानीय पोल्ट्री संगठनों का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लेना चाहिए…?
एक अन्य बात यह भी है जो कि विचारणीय है,जितने भी केंद्रीय कुक्कुट अनुसंधान केंद्र (CPDO)हैं या शासकीय कुक्कुट पालन केंद्र हैं वे सभी शहर के बीचोंबीच हैं तो क्या उनसे कोई नुकसान नहीं है…?

२-भारत एक विशाल राष्ट्र है,दुनिया के कई देश तो इसके एक-एक राज्य के बराबर भी नहीं हैं,ऐसी परिस्थिति में यह कहाँ तक तर्कसंगत एवं न्यायसंगत है कि केरल के किसी एक गाँव में दो चार देशी मुर्ग़ियों में बर्ड-फ्लू का वाइरस पाया जाए और पूरे भारत में अलर्ट जारी कर दिया जाए कि अंडे और चिकन का सेवन ना किया जाए।इससे एक ओर जहाँ पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात बन्द हो जाता है वहीं दूसरी ओर अफवाहों के कारण देश में भी इनकी खपत बन्द हो जाती है,इस दोहरी मार से पोल्ट्री किसानों को जबरदस्त आर्थिक नुकसान पहुँचता है।इस आर्थिक त्रासदी से बचने के लिए क्या भारत को 8 या 9 पोल्ट्री जोन में नहीं बांट देना चाहिए, ताकि यदि किसी एक जोन में बर्ड-फ्लू की शिकायत मिलती भी है तो सिर्फ उसी क्षेत्र को निगरानी में रखा जाए शेष जोन इससे अप्रभावित रहें।यदि ऐसा हो पाया तो भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय के लिए यह वरदान होगा।
३- अमेरिकन चिकन लेग पीस को भारत मे आयात होने से रोका जाए नहीं तो भारतीय पोल्ट्री उद्योग को बड़ी आर्थिक क्षति होगी।अनुमानतः ये आयातित चिकन लेग पीस भारत का लगभग 40% व्यवसाय छीन लेंगे।

४-भारतीय पोल्ट्री उद्योग में सालाना लगभग 120 लाख टन मक्का एवं 40 लाख टन सोयामील की खपत होती है जो प्रत्यक्ष रूप से भारतीय कृषि उद्योग को सहायता प्रदान करता है।
५-विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) नें माँ के दूध के बाद अंडे के प्रोटीन को “उच्च प्रोटीन जैविक गुणांक” के साथ प्रकृति में उपलब्ध सर्वोत्तम प्रोटीन का स्रोत माना है।अंडे में प्रोटीन के साथ साथ अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।यदि अंडे को समूचे भारतवर्ष की आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों के मध्यान्ह भोजन में शामिल कर दिया जाए तो कुपोषण हटाने में हमें एक बड़ी जीत प्राप्त हो सकती है।
६-पोल्ट्री को कृषि सह-कार्य की जगह पूर्ण कृषि का दर्जा दिया जाए ताकि पोल्ट्री किसानों को कृषि में मिलने वाली सहायता मिल सकें।
महोदय,इसके अतिरिक्त भी कई अन्य बिंदु हैं किंतु वर्तमान में उपरोक्त वर्णित तथ्यों पर यदि आपका सकारात्मक ध्यानाकर्षण हो जाये तो भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हुए किसानों का उद्धार हो जाएगा।
धन्यवाद।
डॉ. मनोज शुक्ला
पोल्ट्री विशेषज्ञ एवं विचारक
रायपुर, छत्तीसगढ़

Indian Poultry and Antibiotics Post By Dr. Manoj Shukla. भारतीय पोल्ट्री उद्योग और एंटीबायोटिक पोल्ट्री में !

Dr. manoj Shukla Views on use of Poultry Antibiotic
Dr. Manoj Shukla

भारतीय पोल्ट्री उद्योग और एंटीबायोटिक दवाओं का भ्रम… ( Indian Poultry and Antibiotics Post By Dr. Manoj Shukla

मित्रों,आजकल मीडिया और सोशल मीडिया पर एक मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है,और मुद्दा है भारतीय पोल्ट्री उद्योग में उपयोग हो रहे *कोलिस्टिन सल्फेट* नामक एंटीबायोटिक,जिसे मानव जीवन रक्षा हेतु अंतिम जीवन रक्षक एंटीबायोटिक की संज्ञा दी जा रही है,के उपयोग और उसके अवशेषों का अंडे एवं चिकन में पाए जाने को लेकर तथाकथित बुद्धिजीवियों के बीच हाहाकार मचा हुआ है, कि ये अवशेष मनुष्य में इस जीवन रक्षक एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर देंगे जिसके कारण मृत्यु शय्या पर पड़े व्यक्ति को नहीं बचाया जा सकेगा… किंतु यदि हम इस तथ्य की विवेचना करें कि मनुष्य को जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता क्यों पड़ती है…??? तो एक साधारण सा उत्तर मिलेगा “क्योंकि जीवन संकट में आ जाता है इसलिए जीवन बचानें के लिए जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता पड़ती है”….अब यदि यह प्रश्न किया जाए कि जीवन संकट में पड़ता ही क्यों है…??? तो इसका उत्तर हमारे सामने ही यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हो जाता है !

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

 

 

क्योंकि मानव जीवन को संकट में डालने का काम स्वयं मानव ने ही किया है… चहुँ ओर प्रदूषण फैला कर…आज हमारी प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदूषित है, अन्न प्रदूषित है, जल प्रदूषित है, फल प्रदूषित हैं,सब्जियां प्रदूषित हैं, समूची प्रकृति प्लास्टिक और ई-कचरे से प्रदूषित है…ऐसा बचा ही क्या है जो प्रदूषित नहीं है…???और यह प्रदूषण ही मानव जीवन को संकट में डाल रहा है,और यह प्रदूषण इतना भयानक है कि मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune system/Immunity power) को खोखला कर रहा है,जिसके कारण जीवन रक्षा की कोई भी दवा असर नहीं करेगी…इस तथ्य का सबसे भयानक उदाहरण है पंजाब से राजस्थान के बीच चलने वाली “कैंसर एक्सप्रेस”…इस ट्रेन की क्या जरूरत पड़ी यदि इसकी विवेचना करें तो पाएंगे कि पंजाब में अनाज की अधिक से अधिक पैदावार बढ़ाने के लिए अनियंत्रित स्वरूप में कीटनाशक दवाओं और रासायनिक खादों का उपयोग हुआ और आज भी हो रहा है,जिसके कारण वहाँ की जमीन प्रदूषित हो गई और ये अत्यंत हानिकारक रसायन इसी भूमि से भूजल तक एवं अनाज के दानों तक पहुँचे और फिर इन्हीं अनाज के दानों से और भूजल से मनुष्यों के शरीर में पहुंचे,जहाँ रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करके कैंसर जैसी महामारी को जन्म दिया,पंजाब और देश के कई गांवों में कुछ परिवार तो ऐसे हैं जहाँ परिवार का हर सदस्य कैंसर पीड़ित है… जब यह कैंसर

ट्रेन राजस्थान पहुँचती है और इसकी धुलाई होती है तो बल्टियाँ भर-भर के मानव रक्त निकलता है… फलों में मोम की परत (wax coating) लगाई जाती है जो मानव स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक है हम सब जानते हैं…इसी प्रकार सब्जियों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है… तम्बाकू और उससे बने पदार्थों का सेवन कितना हानिकारक है इस बात का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यदि कोई व्यक्ति अपना जीवन बीमा (टर्म प्लान) करवाना चाहे और यदि वह तम्बाकू या सिगरेट का सेवन करता हो तो उसकी वार्षिक बीमा किश्त कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि बीमा कम्पनियों को भी यह पता है कि तम्बाकू का सेवन करने वालों के शरीर में निकोटिन की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि आपातकाल में कोई भी जीवन रक्षक दवा काम ही नहीं करती है…ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जिनसे यह साबित होता है कि मनुष्य ने स्वयं अपने लिए ही जीवन संकट पैदा किया है…
अब यदि हम भारतीय पोल्ट्री उद्योग की बात करें तो हम पाएंगे कि इस उद्योग का आधारभूत सिद्धांत ही “Prevention is better than Cure” है अर्थात बीमारियों को आने

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

ही ना दिया जाए इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है…भारत आयुर्वेद का विश्व गुरु है, आयुर्वेद मनुष्य में जितना उपयोग होता है उससे कई गुना ज्यादा पोल्ट्री उद्योग में उपयोग होता है,क्योंकि यह एक सस्ता और सटीक उपचार होता है… एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग अत्यंत मंहगा होता है और बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी पोल्ट्री फार्मर एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं करता है… पोल्ट्री उद्योग में आज एंटीबायोटिक दवाओं का स्थान प्रोबायोटिक, प्रिबायोटिक, पादप तेल,ऑर्गेनिक एसिड तथा हर्बल दवाओं नें ले लिया है ये सस्ती होने के साथ-साथ अत्याधिक असरदार होती हैं…भारत की कई आयुर्वेदिक दवा निर्माता कम्पनियाँ विदेशों में अपनी दवाओं का अच्छा खासा निर्यात कर रही हैं…भारत एक बहुत बड़ा बाजार है और कुछ विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय पोल्ट्री उद्योग में एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल की बात को एक भ्रम के रूप में फैला रही हैं जिससे भारत मे उत्पादित होने वाले

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

 

 

 

अंडों और चिकन का उपभोग कम हो जाये और ये कम्पनियाँ अपने विदेशी अंडे और चिकन भारत में बेच सकें…क्योंकि यह बात इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को अच्छी तरह से पता है कि हम भारतीयों की मानसिकता यही है कि विदेशी होगा तो अच्छा ही होगा…एक सत्य यह भी है कि *भारत में आज तक जितने भी अंडे और चिकन के सैम्पल टेस्ट हुए हैं उनमें एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष अमेरिकन एवं यूरोपियन मानक स्तरों से बहुत कम पाए गए हैं….जबकि अनाजों,सब्जियों और फलों में हानिकारक रसायनों के अवशेष मानक स्तरों से बहुत ज्यादा पाए गए हैं…*
इसलिए मेरा भारतीय बुद्धिजीवियों से अनुरोध है कि अपने स्वतः के विवेक का उपयोग करें और किसी भ्रम में ना पड़ें…।

 

 

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डॉ. मनोज शुक्ला
पोल्ट्री विशेषज्ञ, रायपुर छत्तीसगढ़

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Cage System Reality For Broiler in Hindi

    ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान!

आज का हमारा मुद्दा है ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान !

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1 ) सबसे पहला नुकसान है ज्यादा गर्मी – क्न्योकि हिंदुस्तान का तापमान पश्चिमी देशो की तुलना में बहुत अधिक है ! इस कारण पिंजरे जो लोहे या एल्युमुनियम के बने होते है बहुत ज्यादा गर्म हो जाते है ! आप जानते ही है गर्मी में बर्ड बहुत ज्यादा परेशान होता है जिस कारण मृत्यु दर काफी बढ़ जाती है !

2 ) बिजली की समस्या -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वंहा बिजली हो न हो फिर भी काम चल जाता है होनी तो वंहा पर भी चाहिए परन्तु  पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो वंहा पर बिजली का होना बहुत जरूरी है ! अगर बर्ड को आप ठंडक न दे पाए तो वंहा पर मृत्यु दर बहुत अधिक होने वाली है !

3 ) खाद निकलने में समस्या -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वंहा से खाद निकलना बहुत आसान होता है परन्तु पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो वंहा से खाद निकलने में बहुत दिक्कत होती है !

4 ) बर्ड को थकान  होना -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वो आसानी से घूम – फिर सकते है परन्तु पिंजरे में पाले हुए बर्ड एक ही जगह रहकर हताश हो जाते है !

5 )शुरुआती खर्च बहुत ज्यादा -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है उनका शुरुवाती खर्च इतना ज्यादा नहीं होता परन्तु पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो शुरआती खर्च बहुत ज्यादा होता है !

6 ) बिजली का बैकअप -अगर बिजली जाने के बाद अगर आप के पास वैकल्पिक व्यवस्था ना हो तो पिंजरों में ब्रायलर पालने की कभी मत सोचियेगा !

 उम्मीद करते है की आपको जानकारी पसंद आई  होगी !

इसके अलावा ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान के साथ- साथ फायदे भी है उन्हें भी आप आने वाले लेख मे सब्सक्राइब करके जान लीजियेगा ! कृपया करके फेसबुक whatsup पर शेयर जरूर करियेगा ! धन्यवाद !

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Easy Loan Process for Poultry Farming with up to 35% subsidy.

उद्यम पूंजी निधि योजना की आसान जानकारी ! ( How to get loan for poultry complete and easy information.
कुक्कुट उद्यम पूंजी निधि योजना नाबार्ड (NABARD) और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा एक योजना शुरू हुई है ! जो मुर्गी पालन पालन करने  वालों को बढावा देने के लिए है। इस योजना में पोल्ट्री उद्योग को पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार को मजबूत  बनाने की कोशिश  है।

इस योजना के तहत, एक परिवार के एक से अधिक सदस्यों को सहायता प्रदान की जा सकती है ! लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को अलग  इकाइयां स्थापित करनी होंगी और दोनों  इकाइयों के बीच की दूरी कम से कम 500 मीटर होनी चाहिए ! साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखें ! दुर्गन्ध और मक्क्खियों की समस्या अगर किसी रिहायशी जगह को प्रभावित करती है तो आप परेशानी में आ सकते है ! पूरा ध्यान रखें की सफाई बनी रहे !
किसान द्वारा जरूरी लागत 
एक लाख रुपये तक की ऋण के लिए- जरूरी लागत जिसे मार्जिन लागत भी कहते है ! मतलब ये धन किसान को लगाना जरूरी है ! इसमें किसान को कुछ नहीं लगाना मतलब बैंक ही सारा धन देता है !

अधिक के ऋण – 10% न्यूनतम  पैसा किसान को खुद से लगाना जरूरी है !

सब्सिडी –
सामान्य वर्ग के लिए 25% और एससी / एसटी के लिए 33% !

लोन का भुगतान !

5 से 9 वर्ष के भीतर !
लोन अप्लाई करने की प्रक्रिया !

निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी या  ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी !

  1. रिपोर्ट तैयार करने का सही तरीका रिपोर्ट पशु चिकित्सा अधिकारी बनायेगा जिसके बाद आप परियोजना की रिपोर्ट को लेकर अपने निकटतम बैंक में जाएंगे।बैंक कर्मचारी आपकी फाइल को पारित करेंगे तथा नाबार्ड को भेज देंगे ।नाबार्ड आपके बैंक को धन भेज देगा, जहां से धन आपके खाते में स्थानांतरित किया जाएगा।सब्सिडी का पैसा भी आपके बैंक खाते में जमा किया जाएगा ! बशर्ते आप बैंक से लेन देन सही करे !

दस्तावेज़ !

बेरोजगार होने के लिए शपथ पत्र  !

शपथ पत्र जिसमे लिखा हो कि आप किसी भी बैंक या संस्था के दोषी नहीं हैं !

राशन कार्ड /आधार कार्ड /पैन कार्ड या सभी

गारंटी के लिए भूमि पत्र अगर ऋण राशि 1 लाख रुपये से अधिक है !

जाति प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी यदि सामान्य वर्ग से नहीं है !

तीन पासपोर्ट आकार की तस्वीरें !

अगर ऋण लेने में किसी वाहन या किसी वाहन को चलाना जरूरी  है तो ड्राइवर के लाइसेंस की प्रतिलिपि !

लोन के तहत निम्न घटकों को फंड किया जाता है

लोन के लिये अधिकतम राशी !

  1. टर्की, इमू बतख आदि के लिये  के प्रजनन फार्म – 7.50 लाख रुपये
  2. पैरेंट पक्षी – 16,000 अंडे देने वाले पक्षी प्रति बैच के लिए 10.0 लाख रुपये
  3. हाइब्रिड अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए 20,000 मुर्गियों के लिए-20.00 लाख
  4.  अपने घर में साधारण रूप से पालने के लिए 5 लाख रूपये
  5. फ़ीड मिश्रण इकाइयों और रोग निदान प्रयोगशालाओं के लिए  4 लाख रुपये
  6. खुले पिंजरे वाले परिवहन वाहनों के लिए 2 लाख रुपये
  7. ड्रेसिंग और रिटेल के लिए 2.50 लाख रुपये
  8. विपणन के लिए रिटेल आउटलेट 3.75 लाख रुपये
  9. गाड़ी पर विपणन के लिए या गाड़ी पर मीट बेचने के लिए 2.50 लाख रुपये
  10. पोल्ट्री उत्पादों की कोल्ड स्टोर के लिए 5.0 लाख रुपये
  11. .बड़ी प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयां – हैचरी / अण्डों की वेंडिंग मशीन / अन्य कोई नयी तकनीक 1 करोड़ 25 लाख रुपये !अगर बैंक से लेन देन ठीक नहीं रहा तो सब्सिडी की किश्त नहीं आये ऐसा भी संभव हो  सकता है !  इस लेख को दिये शेयर लिंक से ही शेयर करें  ! आने वाले लेखों के लिए सब्सक्राइब करना न भूलें !
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हैचरी वालों के लिये खास टिप्स हिंदी में ! Tips For Broiler Breeder For Better Hatchability .

                                                                                   हैचरी वालों के लिये खास टिप्स  हिंदी में ! 

हमेशा अंडों को साफ सुथरी जगह पर रखें जहां अंडे रखने हैं वहां  सीलन नहीं होनी चाहिए ! तापमान को सही रखें ! दरवाजा ऐसा ही लगाएं जो खुद-ब-खुद खोलने के बाद बंद हो जाए !  क्योंकि अगर दरवाजा खुला रहा तो वह तापमान (टेंपरेचर ) को बिगाड़ सकता है और इस तरह से हैचेबिलिटी  प्रभावित हो सकती है !

 

अंडे रखने से पहले कम से कम 1 घंटे पहले कमरे का तापमान सही हो जाना चाहिए !

 

अंडे रखने वाले कमरे का तापमान  60 to 62°F  डिग्री होना चाहिए और संबंधित आद्रता  70 to 75% होनी चाहिए ध्यान रखें हर 1 घंटे में तापमान और आर्द्रता नोट करते रहें !

 

कुछ  हैचरी वाले थर्मामीटर को दीवार के साथ या किसी बल्ब के साथ लगा देते हैं जो एक बहुत बड़ी गलती है !

अंडों के जो डब्बे होते हैं उन्हें भी थोड़ा अंतर रखना जरूरी है !  सभी डब्बों  को एक साथ  बिना अंतर के रखना ठीक नहीं होता !

 

ब्रीडिंग फार्म से अंडे एक या डेढ़ घंटे के अंदर कुल रूम में पहुंच जाने चाहिए और इस दौरान उनकी सफाई का काम भी शुरू कर देना चाहिए ! 

ध्यान रखें जो अंडे पहले  कूल  रूम में आए हैं उन्हें  ही पहले बाहर निकालना चाहिए अगर पहले आए अंडे बाद में निकाले जाते हैं तो इससे  हैचेबिलिटी  प्रभावित हो सकती है !

 

हमेशा  three-tier racks तरीका ही अपनाना चाहिए इससे सभी अंडों को सही हवा मिलती है !

एक गलती जो ज्यादातर हैचरी वाले कर लेते हैं  ऐसा देखा गया है कि कई बार दरवाजा इस तरह का होता है कि जब वह खुलता या

बंद होता है तो वह दीवार से टकराता है और शोर करता है दरवाजा इस तरीका का होना  चाहिए जो दीवार से टकराकर शोर ना करे !

पोस्ट को दिये फेसबुक और whatup लिंक से ही शेयर करें ! कॉपी पेस्ट शेयर करना कॉपीराइट का उल्लंघन  माना  जायेगा जो दंडनीय अपराध है !

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सर्दियों में मुर्गी पालन ! Poultry Farming Tips In Winter ! ( Hindi )

ठण्ड के मौसम में विशेष तौर पर ध्यान रखने वाली बातें !
1- सही तापमान- पहले सप्ताह में 90-95 डिग्री फ़ारेनहाइट , दुसरे सप्ताह में 90 डिग्री फ़ारेनहाइट उसके बाद 85 डिग्री फ़ारेनहाइट रखने का प्रावधान है !

      यदि दिन के समय पर्दे खोलने हो तो  सूरज की दिशा में खोले ! ऊंचाई से थोड़ा पर्दा खोले, ताकि सीधी हवा चूजों पर ना पड़े !  शुरुवाती दिनों में साइड से परदे हटाना उचित नहीं  होता , तो फ़ार्म की लंबाई वाली खाली पड़ी एरिया से हवा ली जा सकती है,और एक्सहॉस्ट फैन का उपयोग किया जा सकता है।
      चाहे दिन हो या रात, एक समान तापमान महत्वपूर्ण है,  तापमान को नियंत्रित करने के लिए दोहरे पर्दो का इस्तेमाल  कर सकते हैं, परन्तु ध्यान रखिये !  वेंटिलेशन का ध्यान रखना जरूरी है। नहीं तो  ascites आने मतलब पेट में पानी भरने की समस्या आ सकती है !
2 – सही नमी ( Humidity ) –  Humidity लगभग 60 के आसपास हो। याद रहे यदि ह्यूमिडिटी इससे ज्यादा है, तो ये मानक उचित तापमान की बजाय अधिक तापमान करवा देंगे।
3) ताज़ी हवा का संचार ताकि दूषित गैस का सही निकास हो !और ठंडी हवा के झोंको पर रोक !
4  -पानी का सही तापमान बनाये रखने के लिये गर्म पानी को मिलाना ताकि चूज़े को जो पानी पिलायें वो बहुत ठंडा ना हो ! बहुत ठन्डे पानी से शरीर की गर्मी का नुकसान होगा ! जिससे सही ग्रोथ कभी नहीं मिल सकती ! और चूज़े के कम पानी पीने से Gout आने की सम्भावना बढ़ जायेगी !
5 – चूज़े को साफ़ पानी ही दें ! और पानी के बर्तन रोज़ धोयें !
6 – शुरुवात में जगह प्रति चूज़ा। .20 से  .25 Square Feet जरूर दें ! फिर धीरे धीरे बढ़ायें !
7 -पर्याप्त  तथा सामान रोशनी दें !
8  – वायरल बीमारियों से बचने को वैक्सीनेशन जरूर करें और अत्यंत सावधानी से !
9 -शुरुवात के कुछ दिन पोल्ट्री फार्म पर ही गुजारें ! ताकि तापमान या अन्य किसी गड़बड़ी को तुरंत सही किया जा सके !
10 – चूज़े आने से पहले ही तैयारी पूरी हो जानी चाहिये ! बिछावन कम से कम इंच जरूर रखें ! और तापमान ज़मीन से लेना है ,नाकि ऊंचाई से !
अपने पोल्ट्री फार्म पर उपरोक्त बातों को गंभीरता से लें ! और लोगों के फायदे के लिये पोस्ट शेयर करना न भूलियेगा !

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