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Posts published in “Layer Egg Farming Tips In Hindi.”

Dr Manoj Shukla Views about India Poultry.

विषय:-भारतीय कृषि में पोल्ट्री उद्योग की भूमिका।
सन्दर्भ:- भारतीय कृषकों की आय दोगुनी करने की आपकी विचारधारा एवं 19-20 फरवरी को इसी संदर्भ में दिल्ली की कार्यशाला।

माननीय प्रधानमंत्री जी,हम समस्त भारतवासी इस सारगर्भित सत्य से भलीभांति परिचित हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है।कृषक के जीवन में कृषि के साथ ही उसको सहयोग प्रदान करते हुए चलता है पशुपालन, और आज पशुपालन के क्षेत्र में पोल्ट्री फार्मिंग ने एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।यदि हम भारतीय  पशुपालन पर नजर डालें तो पाएंगे कि पोल्ट्री व्यवसाय ही एक ऐसा व्यवसाय रहा है जो अन्य पशुपालन व्यवसायों की तुलना में,विगत वर्षों में तीव्र गति से बढ़ा है और आज भी बढ़ रहा है।किंतु आज इस व्यवसाय को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और यदि समय रहते इन परेशानियों का समाधान नहीं हो पाया तो भारतीय कृषक इस व्यवसाय को बंद करते चले जायेंगे।कालांतर में बंद होता यह व्यवसाय कृषकों की आमदनी भी कम कर देगा।मैं आपका ध्यान कुछ मुख्य बिंदुओं पर आकर्षित करना चाहूँगा…

१- कृषकों नें जब अपना पोल्ट्री फार्म अपनी कृषि भूमि पर बनाया तब ये सभी फार्म शहरी तथा ग्रामीण आबादियों से दूर उनके खेतों में थे।ये समस्त फार्म ग्रामपंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर बनाये गए थे।किंतु धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ी और भूमाफियाओं नें आसपास की कृषि भूमि खरीदकर उसे आवासीय भूमि में डायवर्सन करवाकर वहाँ रहवासी कालोनियां बनानी शुरू कर दीं।अब ये भूमाफिया तथा इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग इन पोल्ट्री किसानों पर,प्रदूषण को मुद्दा बनाकर विभिन्न माध्यमों से दबाव बनाते हैं कि फार्म बंद कर दो,ऐसे कई प्रकरण न्यायालयों में भी विचाराधीन हैं।महत्वपूर्ण बात यह है कि आज यह पोल्ट्री व्यवसाय उस किसान तथा उसके आश्रित परिवार के जीविकोपार्जन का मुख्य स्रोत है, इसे वह कैसे बन्द कर दे…?जबकि उसनें पशुपालन के अंतर्गत आने वाले समस्त नियमों का पालन करते हुए अपना पोल्ट्री फार्म खोला था।आज उससे पूछा जाता है कि…
*तुमनें पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु अपनी कृषि भूमि का व्यवसायिक भूमि में डायवर्सन करवाया है कि नहीं…? जबकि नियम तो यह है कि पोल्ट्री व्यवसाय कृषि-सह कार्य (Allied Agriculture) के अंतर्गत आता है और उसके लिए कृषि भूमि का व्यवसायिक भूमि में डायवर्सन करवाना आवश्यक ही नहीं है।
*तुमनें अपना पोल्ट्री फार्म खोलने से पहले “ग्राम तथा नगर निवेश” से अनुमति ली थी कि नहीं…? जबकि जब ये फार्म खुले थे तब ये शहरी आबादी तथा नगर निगम क्षेत्रों से बाहर थे,और नियम यह है कि 1लाख मुर्गियों से कम क्षमता का पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु किसी से अनुमति की आवश्यकता ही नहीं है।
*तुमनें अपना पोल्ट्री फार्म खोलने से पहले प्रदूषण विभाग से अनुमति ली थी कि नहीं…? जबकि यहाँ भी यही नियम है कि पोल्ट्री व्यवसाय एक कृषि सह-कार्य है जिससे वातारण को कोई नुकसान नहीं होता है तथा 1लाख मुर्गियों से कम क्षमता वाले पोल्ट्री फार्मों को इसकी आवश्यकता ही नहीं है।
महोदय, अब मैं आपसे एक प्रश्न करना चाहता हूँ, कि जिस तरह अपनी कृषि भूमि पर अपना पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु ग्रामपंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है,ठीक उसी तरह किसी पोल्ट्री फार्म के आसपास रहवासी कॉलोनी बनाने से पहले स्थानीय पोल्ट्री संगठनों का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लेना चाहिए…?
एक अन्य बात यह भी है जो कि विचारणीय है,जितने भी केंद्रीय कुक्कुट अनुसंधान केंद्र (CPDO)हैं या शासकीय कुक्कुट पालन केंद्र हैं वे सभी शहर के बीचोंबीच हैं तो क्या उनसे कोई नुकसान नहीं है…?

२-भारत एक विशाल राष्ट्र है,दुनिया के कई देश तो इसके एक-एक राज्य के बराबर भी नहीं हैं,ऐसी परिस्थिति में यह कहाँ तक तर्कसंगत एवं न्यायसंगत है कि केरल के किसी एक गाँव में दो चार देशी मुर्ग़ियों में बर्ड-फ्लू का वाइरस पाया जाए और पूरे भारत में अलर्ट जारी कर दिया जाए कि अंडे और चिकन का सेवन ना किया जाए।इससे एक ओर जहाँ पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात बन्द हो जाता है वहीं दूसरी ओर अफवाहों के कारण देश में भी इनकी खपत बन्द हो जाती है,इस दोहरी मार से पोल्ट्री किसानों को जबरदस्त आर्थिक नुकसान पहुँचता है।इस आर्थिक त्रासदी से बचने के लिए क्या भारत को 8 या 9 पोल्ट्री जोन में नहीं बांट देना चाहिए, ताकि यदि किसी एक जोन में बर्ड-फ्लू की शिकायत मिलती भी है तो सिर्फ उसी क्षेत्र को निगरानी में रखा जाए शेष जोन इससे अप्रभावित रहें।यदि ऐसा हो पाया तो भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय के लिए यह वरदान होगा।
३- अमेरिकन चिकन लेग पीस को भारत मे आयात होने से रोका जाए नहीं तो भारतीय पोल्ट्री उद्योग को बड़ी आर्थिक क्षति होगी।अनुमानतः ये आयातित चिकन लेग पीस भारत का लगभग 40% व्यवसाय छीन लेंगे।

४-भारतीय पोल्ट्री उद्योग में सालाना लगभग 120 लाख टन मक्का एवं 40 लाख टन सोयामील की खपत होती है जो प्रत्यक्ष रूप से भारतीय कृषि उद्योग को सहायता प्रदान करता है।
५-विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) नें माँ के दूध के बाद अंडे के प्रोटीन को “उच्च प्रोटीन जैविक गुणांक” के साथ प्रकृति में उपलब्ध सर्वोत्तम प्रोटीन का स्रोत माना है।अंडे में प्रोटीन के साथ साथ अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।यदि अंडे को समूचे भारतवर्ष की आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों के मध्यान्ह भोजन में शामिल कर दिया जाए तो कुपोषण हटाने में हमें एक बड़ी जीत प्राप्त हो सकती है।
६-पोल्ट्री को कृषि सह-कार्य की जगह पूर्ण कृषि का दर्जा दिया जाए ताकि पोल्ट्री किसानों को कृषि में मिलने वाली सहायता मिल सकें।
महोदय,इसके अतिरिक्त भी कई अन्य बिंदु हैं किंतु वर्तमान में उपरोक्त वर्णित तथ्यों पर यदि आपका सकारात्मक ध्यानाकर्षण हो जाये तो भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हुए किसानों का उद्धार हो जाएगा।
धन्यवाद।
डॉ. मनोज शुक्ला
पोल्ट्री विशेषज्ञ एवं विचारक
रायपुर, छत्तीसगढ़

Indian Poultry and Antibiotics Post By Dr. Manoj Shukla. भारतीय पोल्ट्री उद्योग और एंटीबायोटिक पोल्ट्री में !

Dr. manoj Shukla Views on use of Poultry Antibiotic
Dr. Manoj Shukla

भारतीय पोल्ट्री उद्योग और एंटीबायोटिक दवाओं का भ्रम… ( Indian Poultry and Antibiotics Post By Dr. Manoj Shukla

मित्रों,आजकल मीडिया और सोशल मीडिया पर एक मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है,और मुद्दा है भारतीय पोल्ट्री उद्योग में उपयोग हो रहे *कोलिस्टिन सल्फेट* नामक एंटीबायोटिक,जिसे मानव जीवन रक्षा हेतु अंतिम जीवन रक्षक एंटीबायोटिक की संज्ञा दी जा रही है,के उपयोग और उसके अवशेषों का अंडे एवं चिकन में पाए जाने को लेकर तथाकथित बुद्धिजीवियों के बीच हाहाकार मचा हुआ है, कि ये अवशेष मनुष्य में इस जीवन रक्षक एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर देंगे जिसके कारण मृत्यु शय्या पर पड़े व्यक्ति को नहीं बचाया जा सकेगा… किंतु यदि हम इस तथ्य की विवेचना करें कि मनुष्य को जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता क्यों पड़ती है…??? तो एक साधारण सा उत्तर मिलेगा “क्योंकि जीवन संकट में आ जाता है इसलिए जीवन बचानें के लिए जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता पड़ती है”….अब यदि यह प्रश्न किया जाए कि जीवन संकट में पड़ता ही क्यों है…??? तो इसका उत्तर हमारे सामने ही यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हो जाता है !

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

 

 

क्योंकि मानव जीवन को संकट में डालने का काम स्वयं मानव ने ही किया है… चहुँ ओर प्रदूषण फैला कर…आज हमारी प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदूषित है, अन्न प्रदूषित है, जल प्रदूषित है, फल प्रदूषित हैं,सब्जियां प्रदूषित हैं, समूची प्रकृति प्लास्टिक और ई-कचरे से प्रदूषित है…ऐसा बचा ही क्या है जो प्रदूषित नहीं है…???और यह प्रदूषण ही मानव जीवन को संकट में डाल रहा है,और यह प्रदूषण इतना भयानक है कि मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune system/Immunity power) को खोखला कर रहा है,जिसके कारण जीवन रक्षा की कोई भी दवा असर नहीं करेगी…इस तथ्य का सबसे भयानक उदाहरण है पंजाब से राजस्थान के बीच चलने वाली “कैंसर एक्सप्रेस”…इस ट्रेन की क्या जरूरत पड़ी यदि इसकी विवेचना करें तो पाएंगे कि पंजाब में अनाज की अधिक से अधिक पैदावार बढ़ाने के लिए अनियंत्रित स्वरूप में कीटनाशक दवाओं और रासायनिक खादों का उपयोग हुआ और आज भी हो रहा है,जिसके कारण वहाँ की जमीन प्रदूषित हो गई और ये अत्यंत हानिकारक रसायन इसी भूमि से भूजल तक एवं अनाज के दानों तक पहुँचे और फिर इन्हीं अनाज के दानों से और भूजल से मनुष्यों के शरीर में पहुंचे,जहाँ रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करके कैंसर जैसी महामारी को जन्म दिया,पंजाब और देश के कई गांवों में कुछ परिवार तो ऐसे हैं जहाँ परिवार का हर सदस्य कैंसर पीड़ित है… जब यह कैंसर

ट्रेन राजस्थान पहुँचती है और इसकी धुलाई होती है तो बल्टियाँ भर-भर के मानव रक्त निकलता है… फलों में मोम की परत (wax coating) लगाई जाती है जो मानव स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक है हम सब जानते हैं…इसी प्रकार सब्जियों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है… तम्बाकू और उससे बने पदार्थों का सेवन कितना हानिकारक है इस बात का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यदि कोई व्यक्ति अपना जीवन बीमा (टर्म प्लान) करवाना चाहे और यदि वह तम्बाकू या सिगरेट का सेवन करता हो तो उसकी वार्षिक बीमा किश्त कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि बीमा कम्पनियों को भी यह पता है कि तम्बाकू का सेवन करने वालों के शरीर में निकोटिन की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि आपातकाल में कोई भी जीवन रक्षक दवा काम ही नहीं करती है…ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जिनसे यह साबित होता है कि मनुष्य ने स्वयं अपने लिए ही जीवन संकट पैदा किया है…
अब यदि हम भारतीय पोल्ट्री उद्योग की बात करें तो हम पाएंगे कि इस उद्योग का आधारभूत सिद्धांत ही “Prevention is better than Cure” है अर्थात बीमारियों को आने

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

ही ना दिया जाए इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है…भारत आयुर्वेद का विश्व गुरु है, आयुर्वेद मनुष्य में जितना उपयोग होता है उससे कई गुना ज्यादा पोल्ट्री उद्योग में उपयोग होता है,क्योंकि यह एक सस्ता और सटीक उपचार होता है… एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग अत्यंत मंहगा होता है और बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी पोल्ट्री फार्मर एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं करता है… पोल्ट्री उद्योग में आज एंटीबायोटिक दवाओं का स्थान प्रोबायोटिक, प्रिबायोटिक, पादप तेल,ऑर्गेनिक एसिड तथा हर्बल दवाओं नें ले लिया है ये सस्ती होने के साथ-साथ अत्याधिक असरदार होती हैं…भारत की कई आयुर्वेदिक दवा निर्माता कम्पनियाँ विदेशों में अपनी दवाओं का अच्छा खासा निर्यात कर रही हैं…भारत एक बहुत बड़ा बाजार है और कुछ विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय पोल्ट्री उद्योग में एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल की बात को एक भ्रम के रूप में फैला रही हैं जिससे भारत मे उत्पादित होने वाले

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

 

 

 

अंडों और चिकन का उपभोग कम हो जाये और ये कम्पनियाँ अपने विदेशी अंडे और चिकन भारत में बेच सकें…क्योंकि यह बात इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को अच्छी तरह से पता है कि हम भारतीयों की मानसिकता यही है कि विदेशी होगा तो अच्छा ही होगा…एक सत्य यह भी है कि *भारत में आज तक जितने भी अंडे और चिकन के सैम्पल टेस्ट हुए हैं उनमें एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष अमेरिकन एवं यूरोपियन मानक स्तरों से बहुत कम पाए गए हैं….जबकि अनाजों,सब्जियों और फलों में हानिकारक रसायनों के अवशेष मानक स्तरों से बहुत ज्यादा पाए गए हैं…*
इसलिए मेरा भारतीय बुद्धिजीवियों से अनुरोध है कि अपने स्वतः के विवेक का उपयोग करें और किसी भ्रम में ना पड़ें…।

 

 

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डॉ. मनोज शुक्ला
पोल्ट्री विशेषज्ञ, रायपुर छत्तीसगढ़

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Easy Loan Process for Poultry Farming with up to 35% subsidy.

उद्यम पूंजी निधि योजना की आसान जानकारी ! ( How to get loan for poultry complete and easy information.
कुक्कुट उद्यम पूंजी निधि योजना नाबार्ड (NABARD) और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा एक योजना शुरू हुई है ! जो मुर्गी पालन पालन करने  वालों को बढावा देने के लिए है। इस योजना में पोल्ट्री उद्योग को पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार को मजबूत  बनाने की कोशिश  है।

इस योजना के तहत, एक परिवार के एक से अधिक सदस्यों को सहायता प्रदान की जा सकती है ! लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को अलग  इकाइयां स्थापित करनी होंगी और दोनों  इकाइयों के बीच की दूरी कम से कम 500 मीटर होनी चाहिए ! साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखें ! दुर्गन्ध और मक्क्खियों की समस्या अगर किसी रिहायशी जगह को प्रभावित करती है तो आप परेशानी में आ सकते है ! पूरा ध्यान रखें की सफाई बनी रहे !
किसान द्वारा जरूरी लागत 
एक लाख रुपये तक की ऋण के लिए- जरूरी लागत जिसे मार्जिन लागत भी कहते है ! मतलब ये धन किसान को लगाना जरूरी है ! इसमें किसान को कुछ नहीं लगाना मतलब बैंक ही सारा धन देता है !

अधिक के ऋण – 10% न्यूनतम  पैसा किसान को खुद से लगाना जरूरी है !

सब्सिडी –
सामान्य वर्ग के लिए 25% और एससी / एसटी के लिए 33% !

लोन का भुगतान !

5 से 9 वर्ष के भीतर !
लोन अप्लाई करने की प्रक्रिया !

निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी या  ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी !

  1. रिपोर्ट तैयार करने का सही तरीका रिपोर्ट पशु चिकित्सा अधिकारी बनायेगा जिसके बाद आप परियोजना की रिपोर्ट को लेकर अपने निकटतम बैंक में जाएंगे।बैंक कर्मचारी आपकी फाइल को पारित करेंगे तथा नाबार्ड को भेज देंगे ।नाबार्ड आपके बैंक को धन भेज देगा, जहां से धन आपके खाते में स्थानांतरित किया जाएगा।सब्सिडी का पैसा भी आपके बैंक खाते में जमा किया जाएगा ! बशर्ते आप बैंक से लेन देन सही करे !

दस्तावेज़ !

बेरोजगार होने के लिए शपथ पत्र  !

शपथ पत्र जिसमे लिखा हो कि आप किसी भी बैंक या संस्था के दोषी नहीं हैं !

राशन कार्ड /आधार कार्ड /पैन कार्ड या सभी

गारंटी के लिए भूमि पत्र अगर ऋण राशि 1 लाख रुपये से अधिक है !

जाति प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी यदि सामान्य वर्ग से नहीं है !

तीन पासपोर्ट आकार की तस्वीरें !

अगर ऋण लेने में किसी वाहन या किसी वाहन को चलाना जरूरी  है तो ड्राइवर के लाइसेंस की प्रतिलिपि !

लोन के तहत निम्न घटकों को फंड किया जाता है

लोन के लिये अधिकतम राशी !

  1. टर्की, इमू बतख आदि के लिये  के प्रजनन फार्म – 7.50 लाख रुपये
  2. पैरेंट पक्षी – 16,000 अंडे देने वाले पक्षी प्रति बैच के लिए 10.0 लाख रुपये
  3. हाइब्रिड अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए 20,000 मुर्गियों के लिए-20.00 लाख
  4.  अपने घर में साधारण रूप से पालने के लिए 5 लाख रूपये
  5. फ़ीड मिश्रण इकाइयों और रोग निदान प्रयोगशालाओं के लिए  4 लाख रुपये
  6. खुले पिंजरे वाले परिवहन वाहनों के लिए 2 लाख रुपये
  7. ड्रेसिंग और रिटेल के लिए 2.50 लाख रुपये
  8. विपणन के लिए रिटेल आउटलेट 3.75 लाख रुपये
  9. गाड़ी पर विपणन के लिए या गाड़ी पर मीट बेचने के लिए 2.50 लाख रुपये
  10. पोल्ट्री उत्पादों की कोल्ड स्टोर के लिए 5.0 लाख रुपये
  11. .बड़ी प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयां – हैचरी / अण्डों की वेंडिंग मशीन / अन्य कोई नयी तकनीक 1 करोड़ 25 लाख रुपये !अगर बैंक से लेन देन ठीक नहीं रहा तो सब्सिडी की किश्त नहीं आये ऐसा भी संभव हो  सकता है !  इस लेख को दिये शेयर लिंक से ही शेयर करें  ! आने वाले लेखों के लिए सब्सक्राइब करना न भूलें !
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पोल्ट्री में मृत्यु दर के कारण ! बचाव और सावधानियां ! Reason of 90% Mortality in Poultry Farming. Reason and Precaution .

पोल्ट्री की वायरल और बैक्टीरियल बीमारियॉं ! बचाव और सावधानियां !

आज का मुद्दा है पोल्ट्री की वायरल और बैक्टीरियल बीमारियॉं ! 

दो ऐसे कारण  है जिसकी वजह से पुरे संसार में पोल्ट्री फार्म पर मृत्यु दर 90 %  से अधिक होती है !

1 ) वायरल

2 ) बैक्टीरियल

होता क्या है कि फार्मर  इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते जिसकी वजह से बहुत भारी नुकसान उनको होता है !

1 ) वायरल –

एक कड़वा सच वायरल बीमारी का कोई इलाज ही नहीं है ! 

जैसे -रानीखेत, गुम्बारो ,इन्फलुजा  ये सभी वायरल कारणों में आते है ! वायरल आने के बाद और इनकी कोई दवा नहीं होती है बहुत सारे पोल्ट्री फार्मर  यह जानना चाहते हैं कि इन बीमारियों से कैसे बचा जाये ! केवल सुरक्षा ही इसका इलाज है आप अपने बर्ड को शुरूआत से ही ऐसा तैयार कीजिए कि उसकी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बहुत ज्यादा हो ! आप अपने बर्ड को शुरुआत से ही हर्बल चीजें दे सकते हैं जिस वजह से उनकी बीमारियों से लड़ने की या रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक हो जाती है! बहुत सारी कंपनियां हर्बल उपाय को लेकर  दवाई बनाती रहती हैं ! जल्द ही हम इसी पोस्ट में लिंक डाल देंगे ,आप सीधे कंपनियों से ही खरीद सकते है ! 

सावधानियां -Vaccination ही सिर्फ एकमात्र बचाव है ! 

Vaccination सावधानी से करें ! सिर्फ 2 घंटों में Vaccination ख़त्म हो जानी चाहिये ! Vaccine विश्वसनीय जगह से ही खरीदें  और Vaccine लाने के लिये ज्यादा बर्फ और गर्मी से बचाने वाले डब्बे में ही लायें ! लिफाफे में  Vaccine लाने से इसकी कार्यक्षमता ख़त्म हो सकती है !

2 ) बैक्टीरियल- जैसे – CRD ,CCRD ,इकोलाई ये सभी बैक्टीरियल कारणों  में आती है ,और इनकी दवाइंया  है  पर  इसमें सावधानी बरतनी  है उदाहरण के लिए जब बर्ड  किसी हैचरी से आपके पोल्ट्री फार्म पर आता है तो आप पहले दिन से लेकर पांचवें  दिन तक उसको एंटीबायटिक देते हैं वह एंटीबायोटिक इसलिए दिया जाता है कि हो सकता है कि जिस हैचरी से आपने बर्ड खरीदा है उसमें पहले से कोई इन्फेक्शन मौजूद हो परंतु आने वाले वक़्त में अगरजब बर्ड  को कोई प्रॉब्लम हो तोआप वही एंटीबायोटिक उसको दोबारा देंगे  वह एंटीबायोटिक काम नहीं करेगा क्योंकि वह आपने पहले ही दे दिया है और बर्ड का शरीर आदी हो जाता है ! इसलिए शुरुआत में आपने एंटीबायोटिक बिल्कुल ही लाइट देना है ताकि आगे जाकर आपको कोई दिक्कत ना हो !

 वायरस और बैक्टीरिया होते हैं यह अलग-अलग रूप में अलग-अलग तरीके से अपना काम करते हैं ! 

इसलिये हर बीमारी के लिये अलग एंटीबायोटिक और पोल्ट्री फार्म पर पुराने दिये एंटीबायोटिक के हिसाब से  ही इलाज करना ठीक रहता है !

   बैक्टीरिया  लाभ वाले भी होते हैं और हानिकारक भी होते हैं और वायरस पोल्ट्री फार्म पर तो बिल्कुल ही हानिकारक होते हैं इसलिए इन दोनों बीमारियों से बचने के लिए आपने शुरुआती दौर में ही अपने बर्ड  सही देखभाल दें ! पहले सात दिन तापमान बनाये रखें ! और कोशिश करिये पहले सात दिन खुद ही निगरानी रखें चाहे रात का ही वक़्त क्यों न हो !

 ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाए और  बीमारियों का उन पर कोई असर ना पड़े या कम पड़े  !

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जरूरी सूचना – नीचे या ऊपर दिये फेसबुक और Whatsup लिंक से ही अपने सभी फेसबुक और whatsup ग्रुप में शेयर करके सभी पौल्ट्री से जुड़े मित्रों का फायदा करना न भूलियेगा ! याद रखियेगा poultryindiatv.com . इस लेख से रेट बिना दिये फेसबुक और Whatsup लिंक शेयर लिंक से निकाल कर भेजना कॉपीराइट का उल्लंघन है और दंडनीय अपराध है !

 

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मुर्गियों में सफेद दस्त का कारण और समाधान ! White Diarrhea In Broiler.

          मुर्गियों में सफेद दस्त का कारण और समाधान ! White Diarrhea In Broiler.

  नमस्कार दोस्तों आज का मुद्दा है मुर्गियों में सफेद बीट का कारण और समाधान !

   मुर्गियों की सफेद आ रही हैं तो आप यह समझ लीजिए कि मुर्गी फीड जो खाती रहेगी वजन नहीं देगी ! मतलब बेहतर नहीं आएगी ! यही अगर अंडे देने वाली मुर्गी में अगर यह समस्या आएगी तो आप जान लीजिए की प्रोडक्शन  सही होने वाली नहीं है !

       आप अगर कारण जानते  हैं ,  तो समाधान भी अच्छे तरीके से कर सकते हैं ! मुर्गी के  शरीर में बाइल नाम का तरल पदार्थ बनता है ! जो लीवर से निकलता है या आप यूं कह ले ली वही इसको बनाता है !और यह गोल ब्लैडर में इकट्ठा होता रहता है ! इसका मुख्य काम है , भोजन को पचाना !

  यह बाइल मुर्गी के के शरीर में बेहतर बनता रहेगा तो तो उसकी बीच हल्के भूरे रंग की आएगी ! आप यह समझ लीजिए कि ब्रायलर की FCR बेहतर आएगी या मुर्गी की प्रोडक्शन अच्छी आती रहेगी !

   और ब्रायलर बेहतर वजन तथा लेयर लंबे समय तक अंडे अच्छे द्वारा में देती रहेगी  !

          दरअसल बाइल को आप यह समझ लीजिए कि भोजन को पचाने वाला एंजाइम या भोजन को पचाने में मदद करने वाले केमिकल इन का  मिश्रण आप  कह लें !

 अगर यह बायलर मुर्गी के शरीर में नहीं बनेगा या कम बनेगा तो मुर्गी की बीट का रंग हल्का होना शुरू हो जाएगा यह इंसानों पर भी लागू होती है !

              ध्यान रखे कि बाईल बनता कहाँ है ? यह  बनता है लीवर के द्वारा ! !

   इसका मतलब लीवर की कार्य क्षमता कमजोर हो गई है !

       तो आप सफेद बीट  को ठीक करना है तो इसका मतलब बाइल को ठीक करना है ! बाइल को ठीक करने का मतलब लीवर की कार्य क्षमता को ठीक करना !

 दवायें  देने से पहले आप यह सब से पहले ध्यान रखें कि आप को पानी और फीड की गुणवत्ता को ध्यान रखना है क्योंकि फीड की गुणवत्ता अगर ठीक नहीं है,  मुर्गियों की  फीड में फंगस ज्यादा है !

Poultry Feed

या टॉक्सिंस ज्यादा हैं !  आप जितनी मर्जी दवाई देते रहे उससे कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला !

   समस्या वही की वही रहने वाली है और पानी आप जो अपनी मुर्गियों को दे रहे हैं उस पानी में अगर समस्याएं रहेंगी उस में वायरल या बैक्टीरियल  लोड अधिक हो तो भी आपके मुर्गियों को कोई भी फर्क पड़ने वाला नहीं है किसी भी तरह की अच्छी-अच्छी दवाइयां भी आप देते रहें !

           अगर यह समस्या आ ही गयी है तो इसका समाधान क्या करें ! आप के पोल्ट्री फार्म पर  सफ़ेद बीट आये तुरंत लिवर टॉनिक को शुरू कर दीजिए ! जो आपने लिवर टॉनिक देना है वह दे दो तरह के देने हैं कम से कम पहले 3 दिन सिंथेटिक और हर्बल दोनों !आप डॉक्टर की सलाह लेकर यह दोनों दे दीजिए !

                 बाद में चाहे कोई भी एक तरह का लिवर टॉनिक दे सकते है ! कम से कम 7 दिन जरूर दें ! ज्यादा भी दे सकते है ! एक बात कभी भी ना भूलें , अच्छी कंपनी का ही लिवर टॉनिक हो ! इससे आपको रिजल्ट अच्छे मिलेंगे !

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Poultry Farming On Roof in Hindi.घर में या छत पर पोल्ट्री फार्म बनाने से पहले जरूरी जानकारी !

                                    छत पर पोल्ट्री फार्म बनाने से पहले जरूरी जानकारी !

  कुछ किसान जानना चाहते हैं कि छोटे स्तर से वह अपने अपनी घर की छत से कैसे पोल्ट्री फार्मिंग शुरू कर सकते हैं और कौन-कौन सी जरूरी बातें हैं जो उनको ध्यान में रखनी होगी और तो आज हम किसी के बारे में आपको बताएंगे !

     सबसे पहले तो हम आपको बता दें कि जहां पर भी आप पोल्ट्री फार्म बनाने जा रहे हैं वह पोल्ट्री फार्म रिहायशी इलाके से दूर हो !

क्योंकि सरकार ने यह आदेश दिया है कि आपका पोल्ट्री फार्म रिहायशी इलाकों के पास में नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे जो अमोनिया गैस निकलती हैं वह रिहायशी इलाकों में ना जाए साथ ही मुर्गियों का शोरगुल भी रिहायशी इलाके हो डिस्टर्ब ना करें !

       दूसरा जो लेयर फार्म (अंडा उत्पादन के लिये बनाया पोल्ट्री फार्म !) है जो  है वहां पर मक्खियों की समस्या बहुत ज्यादा हो जाती है तो सरकार ने इसके बारे में कहा है कि आप अपने फार्म पर मक्खियों का निवारण कीजिए ताकि यह  रिहायशी इलाकों में जाकर वहां पर बीमारियां ना फैलाएं !

         ब्रायलर फार्मिंग और लेयर फार्मिंग दोनों ही आप छत पर बना सकते हैं ! रिहायशी इलाके छत पर आप दोनों का ही पोल्ट्री फार्म बना सकते हैं अगर आप उसे 50-100 बर्ड तक रखना चाहते हैं, तब तो ठीक है अगर आप उसको सोच रहे हैं कि  बड़े स्तर पर करें तो यह संभव नहीं होगा क्योंकि ब्रायलर फार्मिंग में आज नहीं तो कल अगर आप उस को बढ़ाएंगे तो अमोनिया गैस की गंध ,गंदगी और लेयर फार्मिंग के कारण मक्खियों का  ज्यादा पैदा होना !

       वैसे तो किसी को कोई एतराज नहीं होता पर कई दफा इन सभी कारणों की वजह से कोई आपकी शिकायत कर देता है तो आप मुसीबत में फंस सकते हैं !

           इसके अलावा आप जो देसी मुर्गियां है ! 50-100 तक रख सकते हैं !

अपने घर की छत पर उनका खाने की व्यवस्था कर सकते हैं !और उनके अंडे रखने की व्यवस्था कर सकते हैं अगर किसी को ऐतराज न हो ! पोल्ट्री से जुडी अन्य जानकारियों या पोल्ट्री के रोज के रेट जानने के लिये poultryindiatv.com  पर या यूट्यूब पर Poultry India TV सर्च करके भी ले सकते है !

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सर्दियों में मुर्गी पालन ! Poultry Farming Tips In Winter ! ( Hindi )

ठण्ड के मौसम में विशेष तौर पर ध्यान रखने वाली बातें !
1- सही तापमान- पहले सप्ताह में 90-95 डिग्री फ़ारेनहाइट , दुसरे सप्ताह में 90 डिग्री फ़ारेनहाइट उसके बाद 85 डिग्री फ़ारेनहाइट रखने का प्रावधान है !

      यदि दिन के समय पर्दे खोलने हो तो  सूरज की दिशा में खोले ! ऊंचाई से थोड़ा पर्दा खोले, ताकि सीधी हवा चूजों पर ना पड़े !  शुरुवाती दिनों में साइड से परदे हटाना उचित नहीं  होता , तो फ़ार्म की लंबाई वाली खाली पड़ी एरिया से हवा ली जा सकती है,और एक्सहॉस्ट फैन का उपयोग किया जा सकता है।
      चाहे दिन हो या रात, एक समान तापमान महत्वपूर्ण है,  तापमान को नियंत्रित करने के लिए दोहरे पर्दो का इस्तेमाल  कर सकते हैं, परन्तु ध्यान रखिये !  वेंटिलेशन का ध्यान रखना जरूरी है। नहीं तो  ascites आने मतलब पेट में पानी भरने की समस्या आ सकती है !
2 – सही नमी ( Humidity ) –  Humidity लगभग 60 के आसपास हो। याद रहे यदि ह्यूमिडिटी इससे ज्यादा है, तो ये मानक उचित तापमान की बजाय अधिक तापमान करवा देंगे।
3) ताज़ी हवा का संचार ताकि दूषित गैस का सही निकास हो !और ठंडी हवा के झोंको पर रोक !
4  -पानी का सही तापमान बनाये रखने के लिये गर्म पानी को मिलाना ताकि चूज़े को जो पानी पिलायें वो बहुत ठंडा ना हो ! बहुत ठन्डे पानी से शरीर की गर्मी का नुकसान होगा ! जिससे सही ग्रोथ कभी नहीं मिल सकती ! और चूज़े के कम पानी पीने से Gout आने की सम्भावना बढ़ जायेगी !
5 – चूज़े को साफ़ पानी ही दें ! और पानी के बर्तन रोज़ धोयें !
6 – शुरुवात में जगह प्रति चूज़ा। .20 से  .25 Square Feet जरूर दें ! फिर धीरे धीरे बढ़ायें !
7 -पर्याप्त  तथा सामान रोशनी दें !
8  – वायरल बीमारियों से बचने को वैक्सीनेशन जरूर करें और अत्यंत सावधानी से !
9 -शुरुवात के कुछ दिन पोल्ट्री फार्म पर ही गुजारें ! ताकि तापमान या अन्य किसी गड़बड़ी को तुरंत सही किया जा सके !
10 – चूज़े आने से पहले ही तैयारी पूरी हो जानी चाहिये ! बिछावन कम से कम इंच जरूर रखें ! और तापमान ज़मीन से लेना है ,नाकि ऊंचाई से !
अपने पोल्ट्री फार्म पर उपरोक्त बातों को गंभीरता से लें ! और लोगों के फायदे के लिये पोस्ट शेयर करना न भूलियेगा !

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Ascites Reason,Symptoms and Solutions In Broiler In Hindi | मुर्गी के पेट में पानी भरना कारण और समाधान |

दोस्तों आज का मुद्दा है कि पेट में पानी भरना मुर्गियों के पेट में जो पानी भर जाता है ( Watery Stomach of Broiler ) उसकी वजह क्या है और उसका समाधान क्या है सबसे पहले  हमें यह जान लेना चाहिए कि मुर्गियों के पेट में पानी क्यों भरता है ?

Ascites Reason & Solutions.
Ascites

ज्यादातर ऐसा देखा गया है कि मुर्गियों के पेट में पानी भरने की समस्या सर्दियों में  या पहाड़ी इलाके  हैं उनमें भी मुर्गियों के पेट में पानी भरने की समस्या ज्यादा आती है !

            लेकिन ऐसा नहीं है कि यह बीमारी सर्दियों में ही आती है गर्मियों में भी यह बीमारी आती है !

 

 पहला कारण- हम ब्रायलर को ज्यादा प्रोटीन और ज्यादा एनर्जी देते हैं !

जिससे  ब्रायलर ज्यादा अच्छी तरीके से ग्रोथ कर सके यूं  ज्यादा अच्छे तरीके से वजन ले सके लेकिन ज्यादा प्रोटीन और ज्यादा एनर्जी देने से ब्रायलर  के फेफड़ों और दिल पर ज्यादा जोर पड़ता है तो इससे   ब्रायलर के शरीर की धमनियां , जो खून के दौरे का काम करती हैं उन पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है और वह खून के दबाव को संभाल नहीं पाते और  इससे जो उनके अंदर  जो तरल है  वह    लीक करने लग जाता है ! तो ये तरल का जो लीकेज है यह मुर्गी के पेट में इकट्ठा होने लग जाता है !

                  यह तो मात्र एक पहला कारण है इसके अलावा भी बहुत सारे कारण है कि जिन की वजह से मुर्गियों के पेट में पानी भर जाता है अगर यह कारण आप अच्छी तरीके से जान लेंगे तो आप उनके समाधान भी खुद ही करने में सक्षम हो सकते  है !

             और दूसरा कारण है अमोनिया,  पोल्ट्री फार्म पर अमोनिया गैंस अगर ज्यादा बनेगी तो इससे मुर्गियों को या ब्रायलर को सांस लेने में जो ऑक्सीजन चाहिए वह पूरी तरह नहीं मिल पाती इससे भी वर्ल्ड के फेफड़ों पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है इस वजह से भी मुर्गियों के पेट में पानी भरने लग जाता है !  क्योंकि  फेफड़ों के काम करने की क्षमता काफी  कम हो जाती है !  

 

तीसरा –  पोल्ट्री फॉर्म में  ताजा हवा अगर नहीं आती तो इस से भी बढ़कर की सप्लाई कम होती है इस से भी मुर्गियों के पेट में पानी भरने लगता है !

चौथा-  ऐसा देखा गया है कि जब फसलों का कटाव होता है उस समय हवा में धूलकण बहुत ज्यादा हो जाते हैं और वह धूल कण जो है सांस की नली को प्रभावित करते हैं इससे भी अब चीजों की सप्लाई मुर्गियों में कम हो जाती है और यह भी पेट में पानी भरने का कारण हो सकता है !

   पोल्ट्री फॉर्म पर बहुत अन्य कैसे भी बनती हैं उन गैसों का भी अगर सही निकासी आप नहीं करेंगे तो उससे भी पोल्ट्री फॉर्म पर पेट में पानी भरने की समस्या ज्यादा हो जाती है

 

           

Poultry Feed

 ऐसा भी देखा गया है कि ,अगर फीड फार्मूला में आपने नमक ज्यादा मिला दिया हो ,तो भी यह समस्या देखी गई है आम तौर पर देखा गया है कि मुर्गियां पेट के बल गिर कर मरती हैं क्योंकि पेट में पानी की मात्रा ज्यादा होने से पेट पर जोर ज्यादा पड़ता है !

      जोर ज्यादा पड़ेगा तो पेट के बल गिर जाती हैं और वह वही पेट के बल ही मर जाती हैं इस समस्याओं के लक्षण बिल्कुल साफ है कि , आप का पोस्टमार्टम करेंगे जैसे ही ,  मुर्गी को आप काटेंगे तो उसने पेट में बहुत सारा पानी निकलेगा !

 जो फेफड़े लाल रंग के होते हैं अगर आप मुर्गियों का पोस्टमार्टम करेंगे तो आप पाएंगे कि लाल रंग की बजाय हल्के लाल रंग की आपको नजर आएंगे रंग का होता चला जाता है और ऐसा भी देखा गया है कि लीवर बहुत बढ़ जाता है इस लिवर कैसे बढ़ जाता है अब देखी जैसी बॉडी बिल्डर है वह बॉडीबिल्डिंग करता है और उसमें वह ज्यादा वजन उठाता है जिस शरीर के हिस्से पर वह ज्यादा जोर डालता है वह हिस्सा मजबूत होने लगता है या बढ़ने लगता है ! परन्तु लीवर का बढ़ना ठीक नहीं है !

           साइंस की लैंग्वेज में इसे  ASCITES कहते  हैं ! और देसी  भाषा में पेट में पानी भरना !   हम इसके समाधान के समाधान के भाव साधारण हैं अगर आप खुद की फीड  बना रहे हैं और उसमें नमक ज्यादा मिला रहे हैं तो आप उसको चेक करें !  कहीं नमक ज्यादा तो नहीं आ रहा अगर नमक ज्यादा आ रहा है उसको कम करें किसी कंसल्टेंट से भी चेक करवां लें !

           हम आपको बता दें नमक 250 ग्राम से 300 ग्राम से ज्यादा ना हो पर टन  1000 किलो फीड पर !

  अब मुख्य बात !  इसका समाधान क्या करना है ! पहले हम आपको बता दें कि पेट में पानी भर रहा है तो लीवर पर सबसे ज्यादा जोर पढ़ रहा है लीवर पर जोर पढ़ रहा है तो इसके लिए आपको लीवर की क्षमता को बढ़ाना पड़ेगा लीवर की क्षमता बढ़ाने के लिए आमतौर पर देखा गया है कुछ लोग

           लीवर  टॉनिक का उपयोग करते हैं !  इसके लिए आपको दोहरे मापदंड में चलना पड़ेगा !

    लीवर  टॉनिक हर्बल के नाम से जाना जाता है !  दूसरा Synthetic के नाम से !

आपको दोनों यूज करने हैं !

                  आपके   पोल्ट्री फॉर्म पर जो अमोनिया गैस बन रही है उसका समाधान कर  लीजिये और पोल्ट्री फार्म के अंदर बन रही गंदी गैसों को भी पोल्ट्री फॉर्म से बाहर कर दें !

                और  ऐसा भी देखा गया है कि जो पोल्ट्री फीड के अंदर वेजिटेबल प्रोटीन मतलब शाकाहारी प्रोटीन अगर ज्यादा दे रहे हैं तो उनके वहां पर  मुर्गियों के  पेट में पानी भरने की समस्या कम हो जाती  हैं !

 

         तो आपको मांसाहारी प्रोटीन की बजाए शाकाहारी प्रोटीन जैसे सोयाबीन है मूंगफली की खल है इनका उपयोग ज्यादा करें !

Poultry Feed

अगर आपके पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के पेट में पानी भरना जैसी समस्या ज्यादा  कम आती है ! मीट एंड  बोन मील के  अलावा या अन्य जो मांसाहारी उत्पाद का प्रयोग  उपयोग मुर्गी फीड में कुछ  समय कम कर दें !

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