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Posts published in “Poultry Broiler Knowledge In Hindi.”

Tips For Profit In Poultry In Hindi | Poultry Management Tips | Poultry Farming Top Tips In Winter | Poultry Farming In India | Poultry Business |

सर्दियों में मुर्गी पालन की जरूरी  बातें !
1) सबसे जरूरी है कि चूज़े पूरी सावधानी से अपने पोल्ट्री फार्म  मंगवायें ,ताकि चूजों पर ठण्ड का ज्यादा तनाव ना पड़े !
2) चूजे आने से पहले ही तापमान 95 डिग्री फ़ारेनहाइट होना चाहिये ! पहले सप्ताह में 90-95 डिग्री फ़ारेनहाइट , दुसरे सप्ताह में 90 डिग्री फ़ारेनहाइट उसके बाद 85 डिग्री फ़ारेनहाइट ज्यादा फायदेमंद है ! है, यह तरीका  तभी उचित हैं जब रिलेटिव ह्यूमिडिटी भी लगभग 60 के आसपास हो।  ये सुनिश्तित कर लें कि फार्म में  पहले किये गए किसी भी स्प्रे की गंध ना हो !
      3) सही नमी/ आर्द्रता बनाकर रखने के लिये तापमान और नमी मापने का थर्मामीटर /मीटर का प्रयोग जरूर करें !
4) ताज़ी शुद्ध  हवा जरूर दें ! लेकिन ताज़ी हवा इतनी ही आये की पोल्ट्री फार्म के अंदर जरूरी तापमान का संतुलन ना बिगड़ जाये
5) ठंडी हवा के झोंको पर रोक लगाने के लिये 2 पर्दे | एक जूट का और एक प्लास्टिक का ताकि प्लास्टिक का पर्दा जरूरत के अनुसार खोलकर बहार की हवा तो मिले पर जूट का पर्दा झोंके से बचा ले ! सूरज की  धूप जहाँ से आ रही हो , वहां  से ही  पर्दा खोले,और पर्दा ऊँचे से थोड़े नाकि पूरा ! नहीं तो तापमान बिगड़ सकता है !
6) दूषित गैस की सही निकास इस तरीके से हो कि बाहर की हवा अंदर के तापमान को बिगड़ ना सके ! धुप ना निकले तो साइड से परदे हटाना से बेहतर तो फ़ार्म की लंबाई वाली खाली पड़ी एरिया से हवा  का आदान प्रदान करें !
7) पानी का सही तापमान बनायें ! पानी में उबलता पानी मिलाकर पानी की ठंडक जरूर कम करें नहीं तो कम पानी पीने से चूज़े में गाउट ना आ जाये !
8) साफ़ पानी ही दें ! अच्छे एसिडिफायर जरूर पानी में मिलायें ,ताकि बीमारी कम आये पर वैक्सीन देने से पहले 1 दिन और बाद के एक दिन एसिडिफायर ना दें
9) पर्याप्त जगह
10) रोशनी पूरे फार्म में चूजों की एरिया में बराबर हो ! कहीं कम या ज्यादा रोशनी नुकसानदायक है
11) सभी वैक्सीन  जरूर करें और सर्दी समझकर पानी को ठंडा करना ना भूलें !
रोजाना के पोल्ट्री भाव जानने के लिये नाम नंबर और ईमेल भर दें ! Poulltry India TV
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डेयरी व्यवसाय की राह पर चल पड़ा है अब पोल्ट्री उद्योग | Poultry Knowledge In Hindi | Issue In Poultry In India |

डेयरी व्यवसाय की राह पर चल पड़ा है अब पोल्ट्री उद्योग…
मित्रों,यह सर्वविदित सत्य है कि अनेक शासकीय सहायताओं तथा सामाजिक स्वीकारोक्तियों के बाद भी भारतीय डेयरी व्यवसाय एक संगठित उद्योग का स्वरूप नहीं ले पाया, जबकि इसके विपरीत भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय नें बहुत ही कम शासकीय सहायताओं तथा सामाजिक स्वीकारोक्तियों के बाद भी एक वृहद संगठित उद्योग का स्वरूप ले लिया है।
मैनें जब इस तथ्य की विवेचना की,कि ऐसा क्यों हुआ तो उसका जो सबसे बड़ा कारण मुझे समझ में आया वह यह  था कि,डेयरी व्यवसाय प्रारंभ से ही बड़े बड़े “सहकारी समूहों” के तथा “कॉर्पोरेट समूहों” के हाँथों में चला गया।इन बड़े समूहों नें छोटे-छोटे डेयरी फार्मरों को पनपने ही नहीं दिया और यह व्यवसाय कभी भी भारत के सुदूर किसी गाँव के अंतिम पंक्ति के अंतिम किसान के जीविकोपार्जन का साधन नहीं बन सका।कम पशु रखकर दूध उत्पादन करने वाला छोटा किसान या छोटा डेयरी फार्मर कभी भी इस व्यवसाय से ज्यादा लाभ नहीं कमा सका और वो हमेशा इन बड़े समूहों का शिकार हुआ और आज भी हो रहा है।बाहर से देखने में यह बड़ा अच्छा लगता है कि दूध,घी,मक्खन इत्यादि में बड़े बड़े समूह हैं जो कि ब्रांड बन चुके हैं और इनके उत्पाद ग्राहक ज्यादा कीमत देकर खरीदते हैं,जबकि किसी छोटे डेयरी वाले से नहीं खरीदते हैं।इन समूहों ने अपने नामों और ब्रांडों की ऐसी मार्केटिंग कर दी है कि एक छोटा डेयरी वाला इनके आगे टिक ही नहीं पाता है।कुछ जगहों पर तो स्थितियाँ ये हैं कि छोटे डेयरी वालों को अपनी उत्पादन लागत निकालना मुश्किल हो जाता है।इन परिस्थितियों में कम पशु रखकर दूध का व्यवसाय करने वाले किसानों के पास सिवाय इसके कोई विकल्प ही नहीं बचता है,
                                            कि वे अपनी डेयरी का दूध इन बड़े समूहों को बेच दें।ये बड़े समूह कम कीमत में इन छोटे किसानों से दूध खरीदते हैं और फिर अपने ब्रांड के नाम से ज्यादा कीमतों में बेचते हैं।इन समूहों ने कई जगहों पर अपनी “दूध संग्रहण इकाइयाँ (milk collection units) खोल ली हैं जहाँ कम पशु रखने वाले ग्रामीण किसान तथा छोटे डेयरी वाले किसान अपनी डेयरी का दूध यहाँ लाकर इन बड़े समूहों को बेचते हैं।यहाँ इन किसानों को जो दूध का मूल्य मिलता है वो लगभग बाजार में बिकने वाले दूध के मूल्य का आधा होता है।धीरे धीरे ये बड़े समूह अपनी डेयरियों में पशुओं की संख्या कम करते जा रहे हैं और ज्यादा दूध बाहर से खरीद रहे हैं, जिसे वो अपने डेयरी प्लांट में “प्रोसेसिंग” करके अपना ब्रांड बनाकर बेच देते हैं… सीधी सी बात है कि “वही महंगे दामों वाली सफेदी कम दामों में मिले तो कोई कम दामों में क्यूँ ना ले”(एक उत्पाद का विज्ञापन याद आ गया जो कि यहाँ चरितार्थ होता है)।कहने का तात्पर्य यह है कि छोटा डेयरी वाला छोटा ही रह गया और बड़ा डेयरी वाला बड़ा होता चला गया जो कि “समग्र विकास” की परिभाषा ही नहीं है और मेरी नजरों में एक यही सबसे बड़ा कारण रहा है कि भारतीय डेयरी आज भी एक व्यवसाय है ना कि एक उद्योग।
अब यदि हम भारतीय पोल्ट्री विशेषकर “ब्रॉयलर उद्योग” की बात करें तो पाएंगे कि यह व्यवसाय अपने व्यवसायिक स्वरूप में भारत के किसी सुदूर गाँव के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने में सफल रहा और इससे जुड़े हुए व्यवसायिक लोगों नें समय समय पर इस व्यवसाय में हो रहे आमूलचूल वैज्ञानिक अनुसंधानों को पोल्ट्री फार्मिंग करने वाले जन-जन तक पहुँचाया।ताकि वे इन नए अनुसंधानों को अपनाकर सफल एवं लाभदायक पोल्ट्री फार्मिंग कर सकें,और पोल्ट्री फार्मरों नें भी इन बातों को समझा और इन बातों पर अमल किया जिसके कारण हर छोटा ब्रॉयलर फार्मर समय के साथ साथ अपनी क्षमताओं को बढ़ाता चला गया।
                                                                                            सौभग्य से इस व्यवसाय में “बड़े उद्योग घरानों का अथवा बड़े समूहों” का वर्चस्व ब्रीडर तथा हैचरियों में तो था किंतु व्यवसायिक ब्रॉयलर फार्मिंग में नहीं था,और यह एक बहुत बड़ा कारण रहा कि भारतीय व्यवसायिक ब्रॉयलर फार्मिंग तेजी से बढ़ती चली गई।यह एक अच्छी व्यवस्था थी जिसमें एक ब्रॉयलर फार्मर किसी हैचरी वाले से चूजा खरीदता था,दाने वाले से दाना, दवाई वाले से दवाई और अपना मुर्गा खुद तैयार करके बाजार में बेचता था।वास्तव में यही था सभी का “समग्र विकास” जिसने भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय को एक संगठित पोल्ट्री उद्योग के स्वरूप में स्थापित कर दिया….किंतु इस उद्योग में यह व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई जब इसमें “इन्टीग्रेशन” का पदार्पण हुआ…अर्थात बड़े बड़े पोल्ट्री घरानों और समूहों का व्यवसायिक ब्रॉयलर फार्मिंग में पदार्पण हुआ…और यह व्यवस्था पूरी तरह उसी व्यवस्था की छायाप्रति है जो कि डेयरी व्यवसाय में शुरुआत से ही रही है।इन्टीग्रेशन एक केन्द्रीकरण तथा विस्तारवादी नीति का अनुसरण करते हुए आज समूचे भारतवर्ष में फैल चुका है,इसने स्वतंत्र ब्रॉयलर फार्मिंग को लगभग समाप्त सा कर दिया है।यदि हम वर्तमान परिस्थितियों का आंकलन करें तो पाएंगें की आज समूचे भारतवर्ष में लगभग 75 से 80 प्रतिशत इन्टीग्रेशन है और मात्र 20 से 25 प्रतिशत स्वतंत्र ब्रॉयलर फार्मिंग बची है और यह बची हुई स्वतंत्र फार्मिंग भी धीरे धीरे समाप्त होती जा रही है।आज ब्रॉयलर फार्मिंग तो बढ़ रही है लेकिन ब्रॉयलर फार्मर खत्म हो रहे हैं,बड़ा और बड़ा होता जा रहा है तथा छोटा और भी छोटा।
मित्रों यह सार्वभौमिक सत्य है कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है किंतु जब परिवर्तन सकारात्मक होते हैं तो वो सृजन को जन्म देते हैं किंतु जब परिवर्तन नकारात्मक हों तो वो विध्वंस को जन्म देते हैं…..
अपनी लेखनी को इसी प्रश्न के साथ विराम देता हूँ कि वर्तमान भारतीय ब्रॉयलर उद्योग में क्या यह परिवर्तन सकारात्मक है अथवा नकारात्मक…???
यह लेख पूर्णतः मेरे प्रायोगिक तथा सैद्धांतिक विचारों पर आधारित है,यह आवश्यक नहीं है कि आप भी इससे सहमत हों,और ना ही मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति, व्यवसायी अथवा संस्था को आहत करना है, अपितु समसामयिक व्यवस्था और उसके अपेक्षित परिणामों को उद्धृत करना है।
“इस बस्ती में कभी मेरा भी मकां होता था
   आँधियों नें छीन लिया वो आसरा,
जो कभी मेरा आशियाँ होता था”
डॉ. मनोज शुक्ला
पोल्ट्री विशेषज्ञ एवं विचारक…
डेयरी व्यवसाय की राह पर चल पड़ा है अब पोल्ट्री उद्योग | Poultry Knowledge In Hindi | Issue In Poultry In India | Post Published on Poultry India TV

PGCF GOLD | पोल्ट्री में तेजी से वजन बढाने और लगत घटाने वाला प्रोडक्ट ! PGCF GOLD |Top Growth Promoter For Poultry.

              Top Growth Promoter For Poultry.

पोल्ट्री में तेज़ी से वजन बढाने और बीमारियाँ कम हो ऐसा सप्लीमेंट !
अनेको पोल्ट्री किसान ये जानना चाहते है कि ,कोई ऐसा प्रोडक्ट बतायें जिसको पोल्ट्री फार्म पर डालें तो वजन ज्यादा मिले ,बीमारियाँ कम आयें ! ताकि मुनाफा बढाया जा सके ! हमें बहुत कंपनियों के द्वारा कई प्रोडक्ट्स के ट्रायल मिलते है ! लेकिन जिस भी पोल्ट्री किसान ने  PGCF GOLD का उपयोग किया उसे फायदा मिला है ! तभी अनेको किसान इस प्रोडक्ट को ले रहे है !
                      HEALTHY GUT HEALTHY BUSINESS

PGCF GOLD में मौजूद अच्छे  बैक्टीरिया शरीर में लैक्टिक एसिड छोड़ते है ,जिस वजह से बुरे,  बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया कम ग्रो कर पाते है ! जिससे पोल्ट्री फार्म में बीमारियां कम आती है ! और ग्रोथ या अंडो की गुणवत्ता बेहतर होती है !

 
              पोल्ट्री किसान अनेको  ग्रोथ बढाने वाले प्रोडक्ट पोल्ट्री में उपयोग करता है !
इस तरह के अनेको प्रोडक्ट्स मार्किट में उपलब्ध है ! परन्तु  जिस किसान ने PGCF GOLD अपने पोल्ट्री फार्म पर अपनाया उसे अच्छी ग्रोथ मिली और पोल्ट्री फार्म पर बीमारियाँ कम आयी !
  यह प्रोडक्ट आँतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है ! पाचन तंत्र बेहतर काम करने से पोल्ट्री में ग्रोथ अच्छी आयेगी !
PGCF GOLD उपयोग करने का तरीका !- PGCF GOLD को कभी भी  ( वैक्सीन से एक दिन पहले और एक दिन बाद छोड़कर ) ! चूज़े आने के दुसरे दिन से बर्ड को देना शुरू करें ! चूंकि PGCF GOLD प्रोडक्ट एंटीबायोटिक फ्री है ! तो आप इसे कभी भी दे सकते है !
          खासतौर पर अगर आप एंटीबायोटिक बर्ड को दे रहे है ! 20 वें दिन से 25 दिन पर ब्रायलर को यह प्रोडक्ट 1 ग्राम 1 लीटर पानी में  6 दिन दिया जाये तो बेहतर परिणाम देखे गए है ! एंटीबायोटिक देने के बाद भी 3 -4 दिन यह  PGCF GOLD दिया जा सकता है !
     अंडे देने वाली मुर्गी को भी इसी डोस में कभी भी दे सकते है ! इससे फार्म के मुर्गियों को फायदा होता है !  कंपनी से इस नंबर पर फ़ोन करके – 93549-12345 ले सकते है !

Composition- Composition of Strains:1. Bacillus Subtilis

2. Bacillus Licheniformis
3. Bacillus Megatherium
4. Lactobacillus Acidophilus
5. Saccharomyces Boulardii
6. Saccharomyces Cerevisiae

7. Cellulomonas Uda

All strains will be provided at a concentration of 2000  Million  + CFU.

 The base material is  Dextrose Monohydrate.
 
आज ही इस प्रोडक्ट का आर्डर देकर अपने पोल्ट्री फार्म का मुनाफा बढायें ! कंपनी का Tin Number , GST नंबर तथा कंपनी रजिस्टर्ड है !
           यहाँ तक की संसार की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Amazon के साथ भी इनका टाई अप है ! आप सीधे कंपनी के खाते में पैसे जमा करवा कर PGCF GOLD मंगवा सकते है ! प्रोडक्ट की गुणवत्ता बेहतर है तथा कम्पनी की जिम्मेदारी हम पूरी तरह से लेते है ! 
यह प्रोडक्ट आँतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है ! वजन बेहतर मिलेगा ! ग्रोथ अच्छी आयेगी !
PGCF GOLD उपयोग करने का तरीका !- PGCF GOLD को कभी भी ब्रायलर या मुर्गी को दे सकते है ( वैक्सीन से एक दिन पहले और एक दिन बाद छोड़कर )! 20 वें दिन से 25 दिन पर ब्रायलर को यह प्रोडक्ट 1 ग्राम 1 लीटर पानी में  6 दिन दिया जाये तो बेहतर परिणाम देखे गए है ! एंटीबायोटिक देने के बाद भी 3 -4 दिन यह  PGCF GOLD दिया जा सकता है !
     मान लीजिये आपके पोल्ट्री फार्म पर 1000 लीटर पानी लग रहा है तो 1 किलोग्राम  PGCF GOLD Double Strength ), 1/2 किलोग्राम  सुबह तथा 1/2 किलोग्राम को शाम के पानी में दें ! टंकी की बजाय सीधे ड्रिंकर्स  के साइड में बराबर मात्रा में सुबह और शाम को दें ! आपको फायदा खुद नज़र आने लगेगा !
सीधे  इस नंबर पर फ़ोन करके – Mobile No.- 93549-12345  से ले सकते है !
Price -850/Kg
Rate-780/kg, if Purchase direct from calling 93549-12345.
कम्पनी उधार भी देती है लेकिन कुछ Dealing के बाद ही !
डीलर के माध्यम से भी ले सकते है !

Dr Manoj Shukla Views about India Poultry.

विषय:-भारतीय कृषि में पोल्ट्री उद्योग की भूमिका।
सन्दर्भ:- भारतीय कृषकों की आय दोगुनी करने की आपकी विचारधारा एवं 19-20 फरवरी को इसी संदर्भ में दिल्ली की कार्यशाला।

माननीय प्रधानमंत्री जी,हम समस्त भारतवासी इस सारगर्भित सत्य से भलीभांति परिचित हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है।कृषक के जीवन में कृषि के साथ ही उसको सहयोग प्रदान करते हुए चलता है पशुपालन, और आज पशुपालन के क्षेत्र में पोल्ट्री फार्मिंग ने एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।यदि हम भारतीय  पशुपालन पर नजर डालें तो पाएंगे कि पोल्ट्री व्यवसाय ही एक ऐसा व्यवसाय रहा है जो अन्य पशुपालन व्यवसायों की तुलना में,विगत वर्षों में तीव्र गति से बढ़ा है और आज भी बढ़ रहा है।किंतु आज इस व्यवसाय को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और यदि समय रहते इन परेशानियों का समाधान नहीं हो पाया तो भारतीय कृषक इस व्यवसाय को बंद करते चले जायेंगे।कालांतर में बंद होता यह व्यवसाय कृषकों की आमदनी भी कम कर देगा।मैं आपका ध्यान कुछ मुख्य बिंदुओं पर आकर्षित करना चाहूँगा…

१- कृषकों नें जब अपना पोल्ट्री फार्म अपनी कृषि भूमि पर बनाया तब ये सभी फार्म शहरी तथा ग्रामीण आबादियों से दूर उनके खेतों में थे।ये समस्त फार्म ग्रामपंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर बनाये गए थे।किंतु धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ी और भूमाफियाओं नें आसपास की कृषि भूमि खरीदकर उसे आवासीय भूमि में डायवर्सन करवाकर वहाँ रहवासी कालोनियां बनानी शुरू कर दीं।अब ये भूमाफिया तथा इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग इन पोल्ट्री किसानों पर,प्रदूषण को मुद्दा बनाकर विभिन्न माध्यमों से दबाव बनाते हैं कि फार्म बंद कर दो,ऐसे कई प्रकरण न्यायालयों में भी विचाराधीन हैं।महत्वपूर्ण बात यह है कि आज यह पोल्ट्री व्यवसाय उस किसान तथा उसके आश्रित परिवार के जीविकोपार्जन का मुख्य स्रोत है, इसे वह कैसे बन्द कर दे…?जबकि उसनें पशुपालन के अंतर्गत आने वाले समस्त नियमों का पालन करते हुए अपना पोल्ट्री फार्म खोला था।आज उससे पूछा जाता है कि…
*तुमनें पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु अपनी कृषि भूमि का व्यवसायिक भूमि में डायवर्सन करवाया है कि नहीं…? जबकि नियम तो यह है कि पोल्ट्री व्यवसाय कृषि-सह कार्य (Allied Agriculture) के अंतर्गत आता है और उसके लिए कृषि भूमि का व्यवसायिक भूमि में डायवर्सन करवाना आवश्यक ही नहीं है।
*तुमनें अपना पोल्ट्री फार्म खोलने से पहले “ग्राम तथा नगर निवेश” से अनुमति ली थी कि नहीं…? जबकि जब ये फार्म खुले थे तब ये शहरी आबादी तथा नगर निगम क्षेत्रों से बाहर थे,और नियम यह है कि 1लाख मुर्गियों से कम क्षमता का पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु किसी से अनुमति की आवश्यकता ही नहीं है।
*तुमनें अपना पोल्ट्री फार्म खोलने से पहले प्रदूषण विभाग से अनुमति ली थी कि नहीं…? जबकि यहाँ भी यही नियम है कि पोल्ट्री व्यवसाय एक कृषि सह-कार्य है जिससे वातारण को कोई नुकसान नहीं होता है तथा 1लाख मुर्गियों से कम क्षमता वाले पोल्ट्री फार्मों को इसकी आवश्यकता ही नहीं है।
महोदय, अब मैं आपसे एक प्रश्न करना चाहता हूँ, कि जिस तरह अपनी कृषि भूमि पर अपना पोल्ट्री फार्म खोलने हेतु ग्रामपंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है,ठीक उसी तरह किसी पोल्ट्री फार्म के आसपास रहवासी कॉलोनी बनाने से पहले स्थानीय पोल्ट्री संगठनों का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लेना चाहिए…?
एक अन्य बात यह भी है जो कि विचारणीय है,जितने भी केंद्रीय कुक्कुट अनुसंधान केंद्र (CPDO)हैं या शासकीय कुक्कुट पालन केंद्र हैं वे सभी शहर के बीचोंबीच हैं तो क्या उनसे कोई नुकसान नहीं है…?

२-भारत एक विशाल राष्ट्र है,दुनिया के कई देश तो इसके एक-एक राज्य के बराबर भी नहीं हैं,ऐसी परिस्थिति में यह कहाँ तक तर्कसंगत एवं न्यायसंगत है कि केरल के किसी एक गाँव में दो चार देशी मुर्ग़ियों में बर्ड-फ्लू का वाइरस पाया जाए और पूरे भारत में अलर्ट जारी कर दिया जाए कि अंडे और चिकन का सेवन ना किया जाए।इससे एक ओर जहाँ पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात बन्द हो जाता है वहीं दूसरी ओर अफवाहों के कारण देश में भी इनकी खपत बन्द हो जाती है,इस दोहरी मार से पोल्ट्री किसानों को जबरदस्त आर्थिक नुकसान पहुँचता है।इस आर्थिक त्रासदी से बचने के लिए क्या भारत को 8 या 9 पोल्ट्री जोन में नहीं बांट देना चाहिए, ताकि यदि किसी एक जोन में बर्ड-फ्लू की शिकायत मिलती भी है तो सिर्फ उसी क्षेत्र को निगरानी में रखा जाए शेष जोन इससे अप्रभावित रहें।यदि ऐसा हो पाया तो भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय के लिए यह वरदान होगा।
३- अमेरिकन चिकन लेग पीस को भारत मे आयात होने से रोका जाए नहीं तो भारतीय पोल्ट्री उद्योग को बड़ी आर्थिक क्षति होगी।अनुमानतः ये आयातित चिकन लेग पीस भारत का लगभग 40% व्यवसाय छीन लेंगे।

४-भारतीय पोल्ट्री उद्योग में सालाना लगभग 120 लाख टन मक्का एवं 40 लाख टन सोयामील की खपत होती है जो प्रत्यक्ष रूप से भारतीय कृषि उद्योग को सहायता प्रदान करता है।
५-विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) नें माँ के दूध के बाद अंडे के प्रोटीन को “उच्च प्रोटीन जैविक गुणांक” के साथ प्रकृति में उपलब्ध सर्वोत्तम प्रोटीन का स्रोत माना है।अंडे में प्रोटीन के साथ साथ अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।यदि अंडे को समूचे भारतवर्ष की आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों के मध्यान्ह भोजन में शामिल कर दिया जाए तो कुपोषण हटाने में हमें एक बड़ी जीत प्राप्त हो सकती है।
६-पोल्ट्री को कृषि सह-कार्य की जगह पूर्ण कृषि का दर्जा दिया जाए ताकि पोल्ट्री किसानों को कृषि में मिलने वाली सहायता मिल सकें।
महोदय,इसके अतिरिक्त भी कई अन्य बिंदु हैं किंतु वर्तमान में उपरोक्त वर्णित तथ्यों पर यदि आपका सकारात्मक ध्यानाकर्षण हो जाये तो भारतीय पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हुए किसानों का उद्धार हो जाएगा।
धन्यवाद।
डॉ. मनोज शुक्ला
पोल्ट्री विशेषज्ञ एवं विचारक
रायपुर, छत्तीसगढ़

Uttar Pradesh Poultry Information| Kanpur Poultry Mandal | Meeting against awareness of High Chicks Price |

कानपुर पोल्ट्री मण्डल *(कानपुर नगर/देहात,उन्नाव,फतेहपुर, बाँदा,हमीरपुर,ओरैया, कन्नौज इत्यादि जिले)* के चिक्स/हैचिंग-अंडा ख़रीदने वाले मुर्गीपालक (फार्मर्स, डीलर ) ने  महँगे चिक्स के प्रति जागरूकता अभियान में भाग लिया ।Uttar Pradeh Poultry

Uttar Pradeh Poultry

संघर्ष समिति के साथी असलम ज़ैदी साहब व बाँदा, फतेहपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, उन्नाव, ओरैया व दूर दुर से आये सभी

UP Poultry Meet
Kanpur Poultry Meet

फार्मर्स/डीलर्स, व पोल्ट्री शुभचिंतकों का आभार। आज की कामयाब मीटिंग के लिए कानपुर पोल्ट्री के पुरोधा हाजी जावेद अहमद साहब व

 

 

 

 

 

UP Poultry Meet
Kanpur Poultry Meet

हमारे बड़े भाई इस्राइल भाई व इस मीटिंग को मंजिल तक पहुचाने में बहुत से साथियों का सहयोग रहा उन सभी को मुबारकऔर धन्यवाद !

 

 

 

 

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Uttar Pradeh Poultry
Uttar Pradeh Poultry

 

 

 

 

 

 

 

Kanpur Poultry Meet
Kanpur Poultry Meet

Indian Poultry and Antibiotics Post By Dr. Manoj Shukla. भारतीय पोल्ट्री उद्योग और एंटीबायोटिक पोल्ट्री में !

Dr. manoj Shukla Views on use of Poultry Antibiotic
Dr. Manoj Shukla

भारतीय पोल्ट्री उद्योग और एंटीबायोटिक दवाओं का भ्रम… ( Indian Poultry and Antibiotics Post By Dr. Manoj Shukla

मित्रों,आजकल मीडिया और सोशल मीडिया पर एक मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है,और मुद्दा है भारतीय पोल्ट्री उद्योग में उपयोग हो रहे *कोलिस्टिन सल्फेट* नामक एंटीबायोटिक,जिसे मानव जीवन रक्षा हेतु अंतिम जीवन रक्षक एंटीबायोटिक की संज्ञा दी जा रही है,के उपयोग और उसके अवशेषों का अंडे एवं चिकन में पाए जाने को लेकर तथाकथित बुद्धिजीवियों के बीच हाहाकार मचा हुआ है, कि ये अवशेष मनुष्य में इस जीवन रक्षक एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर देंगे जिसके कारण मृत्यु शय्या पर पड़े व्यक्ति को नहीं बचाया जा सकेगा… किंतु यदि हम इस तथ्य की विवेचना करें कि मनुष्य को जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता क्यों पड़ती है…??? तो एक साधारण सा उत्तर मिलेगा “क्योंकि जीवन संकट में आ जाता है इसलिए जीवन बचानें के लिए जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता पड़ती है”….अब यदि यह प्रश्न किया जाए कि जीवन संकट में पड़ता ही क्यों है…??? तो इसका उत्तर हमारे सामने ही यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हो जाता है !

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

 

 

क्योंकि मानव जीवन को संकट में डालने का काम स्वयं मानव ने ही किया है… चहुँ ओर प्रदूषण फैला कर…आज हमारी प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदूषित है, अन्न प्रदूषित है, जल प्रदूषित है, फल प्रदूषित हैं,सब्जियां प्रदूषित हैं, समूची प्रकृति प्लास्टिक और ई-कचरे से प्रदूषित है…ऐसा बचा ही क्या है जो प्रदूषित नहीं है…???और यह प्रदूषण ही मानव जीवन को संकट में डाल रहा है,और यह प्रदूषण इतना भयानक है कि मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune system/Immunity power) को खोखला कर रहा है,जिसके कारण जीवन रक्षा की कोई भी दवा असर नहीं करेगी…इस तथ्य का सबसे भयानक उदाहरण है पंजाब से राजस्थान के बीच चलने वाली “कैंसर एक्सप्रेस”…इस ट्रेन की क्या जरूरत पड़ी यदि इसकी विवेचना करें तो पाएंगे कि पंजाब में अनाज की अधिक से अधिक पैदावार बढ़ाने के लिए अनियंत्रित स्वरूप में कीटनाशक दवाओं और रासायनिक खादों का उपयोग हुआ और आज भी हो रहा है,जिसके कारण वहाँ की जमीन प्रदूषित हो गई और ये अत्यंत हानिकारक रसायन इसी भूमि से भूजल तक एवं अनाज के दानों तक पहुँचे और फिर इन्हीं अनाज के दानों से और भूजल से मनुष्यों के शरीर में पहुंचे,जहाँ रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करके कैंसर जैसी महामारी को जन्म दिया,पंजाब और देश के कई गांवों में कुछ परिवार तो ऐसे हैं जहाँ परिवार का हर सदस्य कैंसर पीड़ित है… जब यह कैंसर

ट्रेन राजस्थान पहुँचती है और इसकी धुलाई होती है तो बल्टियाँ भर-भर के मानव रक्त निकलता है… फलों में मोम की परत (wax coating) लगाई जाती है जो मानव स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक है हम सब जानते हैं…इसी प्रकार सब्जियों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है… तम्बाकू और उससे बने पदार्थों का सेवन कितना हानिकारक है इस बात का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यदि कोई व्यक्ति अपना जीवन बीमा (टर्म प्लान) करवाना चाहे और यदि वह तम्बाकू या सिगरेट का सेवन करता हो तो उसकी वार्षिक बीमा किश्त कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि बीमा कम्पनियों को भी यह पता है कि तम्बाकू का सेवन करने वालों के शरीर में निकोटिन की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि आपातकाल में कोई भी जीवन रक्षक दवा काम ही नहीं करती है…ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जिनसे यह साबित होता है कि मनुष्य ने स्वयं अपने लिए ही जीवन संकट पैदा किया है…
अब यदि हम भारतीय पोल्ट्री उद्योग की बात करें तो हम पाएंगे कि इस उद्योग का आधारभूत सिद्धांत ही “Prevention is better than Cure” है अर्थात बीमारियों को आने

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

ही ना दिया जाए इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है…भारत आयुर्वेद का विश्व गुरु है, आयुर्वेद मनुष्य में जितना उपयोग होता है उससे कई गुना ज्यादा पोल्ट्री उद्योग में उपयोग होता है,क्योंकि यह एक सस्ता और सटीक उपचार होता है… एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग अत्यंत मंहगा होता है और बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी पोल्ट्री फार्मर एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं करता है… पोल्ट्री उद्योग में आज एंटीबायोटिक दवाओं का स्थान प्रोबायोटिक, प्रिबायोटिक, पादप तेल,ऑर्गेनिक एसिड तथा हर्बल दवाओं नें ले लिया है ये सस्ती होने के साथ-साथ अत्याधिक असरदार होती हैं…भारत की कई आयुर्वेदिक दवा निर्माता कम्पनियाँ विदेशों में अपनी दवाओं का अच्छा खासा निर्यात कर रही हैं…भारत एक बहुत बड़ा बाजार है और कुछ विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय पोल्ट्री उद्योग में एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल की बात को एक भ्रम के रूप में फैला रही हैं जिससे भारत मे उत्पादित होने वाले

Dr. Manoj Shukla With Poultry's people
Dr. Manoj Shukla With Poultry’s people

 

 

 

अंडों और चिकन का उपभोग कम हो जाये और ये कम्पनियाँ अपने विदेशी अंडे और चिकन भारत में बेच सकें…क्योंकि यह बात इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को अच्छी तरह से पता है कि हम भारतीयों की मानसिकता यही है कि विदेशी होगा तो अच्छा ही होगा…एक सत्य यह भी है कि *भारत में आज तक जितने भी अंडे और चिकन के सैम्पल टेस्ट हुए हैं उनमें एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष अमेरिकन एवं यूरोपियन मानक स्तरों से बहुत कम पाए गए हैं….जबकि अनाजों,सब्जियों और फलों में हानिकारक रसायनों के अवशेष मानक स्तरों से बहुत ज्यादा पाए गए हैं…*
इसलिए मेरा भारतीय बुद्धिजीवियों से अनुरोध है कि अपने स्वतः के विवेक का उपयोग करें और किसी भ्रम में ना पड़ें…।

 

 

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डॉ. मनोज शुक्ला
पोल्ट्री विशेषज्ञ, रायपुर छत्तीसगढ़

Cage System Reality For Broiler in Hindi

    ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान!

आज का हमारा मुद्दा है ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान !

broiler,cages in broiler,

1 ) सबसे पहला नुकसान है ज्यादा गर्मी – क्न्योकि हिंदुस्तान का तापमान पश्चिमी देशो की तुलना में बहुत अधिक है ! इस कारण पिंजरे जो लोहे या एल्युमुनियम के बने होते है बहुत ज्यादा गर्म हो जाते है ! आप जानते ही है गर्मी में बर्ड बहुत ज्यादा परेशान होता है जिस कारण मृत्यु दर काफी बढ़ जाती है !

2 ) बिजली की समस्या -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वंहा बिजली हो न हो फिर भी काम चल जाता है होनी तो वंहा पर भी चाहिए परन्तु  पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो वंहा पर बिजली का होना बहुत जरूरी है ! अगर बर्ड को आप ठंडक न दे पाए तो वंहा पर मृत्यु दर बहुत अधिक होने वाली है !

3 ) खाद निकलने में समस्या -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वंहा से खाद निकलना बहुत आसान होता है परन्तु पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो वंहा से खाद निकलने में बहुत दिक्कत होती है !

4 ) बर्ड को थकान  होना -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वो आसानी से घूम – फिर सकते है परन्तु पिंजरे में पाले हुए बर्ड एक ही जगह रहकर हताश हो जाते है !

5 )शुरुआती खर्च बहुत ज्यादा -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है उनका शुरुवाती खर्च इतना ज्यादा नहीं होता परन्तु पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो शुरआती खर्च बहुत ज्यादा होता है !

6 ) बिजली का बैकअप -अगर बिजली जाने के बाद अगर आप के पास वैकल्पिक व्यवस्था ना हो तो पिंजरों में ब्रायलर पालने की कभी मत सोचियेगा !

 उम्मीद करते है की आपको जानकारी पसंद आई  होगी !

इसके अलावा ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान के साथ- साथ फायदे भी है उन्हें भी आप आने वाले लेख मे सब्सक्राइब करके जान लीजियेगा ! कृपया करके फेसबुक whatsup पर शेयर जरूर करियेगा ! धन्यवाद !

Easy Loan Process for Poultry Farming with up to 35% subsidy.

उद्यम पूंजी निधि योजना की आसान जानकारी ! ( How to get loan for poultry complete and easy information.
कुक्कुट उद्यम पूंजी निधि योजना नाबार्ड (NABARD) और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा एक योजना शुरू हुई है ! जो मुर्गी पालन पालन करने  वालों को बढावा देने के लिए है। इस योजना में पोल्ट्री उद्योग को पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार को मजबूत  बनाने की कोशिश  है।

इस योजना के तहत, एक परिवार के एक से अधिक सदस्यों को सहायता प्रदान की जा सकती है ! लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को अलग  इकाइयां स्थापित करनी होंगी और दोनों  इकाइयों के बीच की दूरी कम से कम 500 मीटर होनी चाहिए ! साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखें ! दुर्गन्ध और मक्क्खियों की समस्या अगर किसी रिहायशी जगह को प्रभावित करती है तो आप परेशानी में आ सकते है ! पूरा ध्यान रखें की सफाई बनी रहे !
किसान द्वारा जरूरी लागत 
एक लाख रुपये तक की ऋण के लिए- जरूरी लागत जिसे मार्जिन लागत भी कहते है ! मतलब ये धन किसान को लगाना जरूरी है ! इसमें किसान को कुछ नहीं लगाना मतलब बैंक ही सारा धन देता है !

अधिक के ऋण – 10% न्यूनतम  पैसा किसान को खुद से लगाना जरूरी है !

सब्सिडी –
सामान्य वर्ग के लिए 25% और एससी / एसटी के लिए 33% !

लोन का भुगतान !

5 से 9 वर्ष के भीतर !
लोन अप्लाई करने की प्रक्रिया !

निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी या  ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी !

  1. रिपोर्ट तैयार करने का सही तरीका रिपोर्ट पशु चिकित्सा अधिकारी बनायेगा जिसके बाद आप परियोजना की रिपोर्ट को लेकर अपने निकटतम बैंक में जाएंगे।बैंक कर्मचारी आपकी फाइल को पारित करेंगे तथा नाबार्ड को भेज देंगे ।नाबार्ड आपके बैंक को धन भेज देगा, जहां से धन आपके खाते में स्थानांतरित किया जाएगा।सब्सिडी का पैसा भी आपके बैंक खाते में जमा किया जाएगा ! बशर्ते आप बैंक से लेन देन सही करे !

दस्तावेज़ !

बेरोजगार होने के लिए शपथ पत्र  !

शपथ पत्र जिसमे लिखा हो कि आप किसी भी बैंक या संस्था के दोषी नहीं हैं !

राशन कार्ड /आधार कार्ड /पैन कार्ड या सभी

गारंटी के लिए भूमि पत्र अगर ऋण राशि 1 लाख रुपये से अधिक है !

जाति प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी यदि सामान्य वर्ग से नहीं है !

तीन पासपोर्ट आकार की तस्वीरें !

अगर ऋण लेने में किसी वाहन या किसी वाहन को चलाना जरूरी  है तो ड्राइवर के लाइसेंस की प्रतिलिपि !

लोन के तहत निम्न घटकों को फंड किया जाता है

लोन के लिये अधिकतम राशी !

  1. टर्की, इमू बतख आदि के लिये  के प्रजनन फार्म – 7.50 लाख रुपये
  2. पैरेंट पक्षी – 16,000 अंडे देने वाले पक्षी प्रति बैच के लिए 10.0 लाख रुपये
  3. हाइब्रिड अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए 20,000 मुर्गियों के लिए-20.00 लाख
  4.  अपने घर में साधारण रूप से पालने के लिए 5 लाख रूपये
  5. फ़ीड मिश्रण इकाइयों और रोग निदान प्रयोगशालाओं के लिए  4 लाख रुपये
  6. खुले पिंजरे वाले परिवहन वाहनों के लिए 2 लाख रुपये
  7. ड्रेसिंग और रिटेल के लिए 2.50 लाख रुपये
  8. विपणन के लिए रिटेल आउटलेट 3.75 लाख रुपये
  9. गाड़ी पर विपणन के लिए या गाड़ी पर मीट बेचने के लिए 2.50 लाख रुपये
  10. पोल्ट्री उत्पादों की कोल्ड स्टोर के लिए 5.0 लाख रुपये
  11. .बड़ी प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयां – हैचरी / अण्डों की वेंडिंग मशीन / अन्य कोई नयी तकनीक 1 करोड़ 25 लाख रुपये !अगर बैंक से लेन देन ठीक नहीं रहा तो सब्सिडी की किश्त नहीं आये ऐसा भी संभव हो  सकता है !  इस लेख को दिये शेयर लिंक से ही शेयर करें  ! आने वाले लेखों के लिए सब्सक्राइब करना न भूलें !

पोल्ट्री ब्रायलर फीड बनाने और लेने वालों के लिये खबर ! Bad news For Broiler Poultry Farmers or Feed manufacturer using Poultry Feed.

पोल्ट्री ब्रायलर फीड बनाने और लेने वालों के लिये खबर ! Bad news For Broiler Poultry Farmers or Feed manufacturer using Soyaben DOC in Poultry Feed.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में घरेलू सोया डीओसी की बढ़ती मांग से लगातार तेजी पोल्ट्री इंडस्ट्री ख़ास तोर पर ब्रायलर पालकों के लिए चिंता का विषय बन रही है !

। गत एक पखवाडे़ के अंतराल इसमें 3000 रुपए प्रति टन की तेजी आ गयी है ! पिछले सालों में ब्रायलर पलकों को ब्रायलर का सही रेट न मिल पाना ,अनेको बीमारियों से हुए नुक्सान तथा अन्य कारण और अब महंगा सोया फीड की गुणवता प्रभावित कर सकता है ! और फीड को महंगा भी कर सकता है !
तीन कारण है सोया के महंगे होने के ! 

इस बार सोयाबीन का उत्पादन अनुमान 92-93 लाख टन के करीब रह जाने से उत्पादन मंडियों में पहले आवक कम चल रही थी  !

1 – अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अर्जेन्टीना, ब्राजील की सोया डीओसी महंगी पड़ने से भारतीय माल की मांग बढ़ गयी है। सोया डीओसी का निर्यात गत वर्ष इन दिनों तक 1.84 लाख टन के करीब हुआ था, जो इस समय बढ़कर 3.32 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। देश में सभी डीओसी का निर्यात गत वर्ष इन दिनों तक 8.76 लाख टन के करीब हुआ था, जो इस बार 19.01 लाख टन का आंकड़ा छू चुका है। इस तरह अलग-अलग डीओसी के निर्यात में भी घरेलू उद्योग ने भारी इजाफा किया है।

2-  सोयाबीन का उत्पादन सभी उत्पादक क्षेत्रों में इस बार पानी की जरूरत के समय सूखा हो जाने से उत्पादकता में भारी गिरावट रही है तथा सकल उत्पादन ताजा उत्पादक मंडियों के सर्वे से केवल 86 लाख टन रह जाने का अनुमान आने लगा है, जो गत वर्ष 105 लाख टन का व्यापारिक अनुमान था। एमपी, महाराष्ट्र, राजस्थान में सोयाबीन की आवक में इजाफा न होने से साल्वेंट प्लांटों को कच्चा माल महंगा खरीदना पड़ रहा है तथा जनवरी व फरवरी दोनों महीनों की डीओसी निर्यातकों ने पोर्ट डिलीवरी पर काफी माल बेचा है।

3 – पिछले वर्ष  में सोया का सही रेट ना मिल पाने से किसानों ने सोया की फसल कम बोयी थी ! और रकबा कम बोया गया था ! बदले में दलहनी फसलों की बुवाई ज्यादा हुई !

सोया की कम आवक और देश विदेश की ज्यादा डिमांड पोल्ट्री किसानों को परेशान कर सकती है

 

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ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान ! Demerits of Broiler Cage System In Poultry.

ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान !

    आज का हमारा मुद्दा है ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान !

 

1 ) सबसे पहला नुकसान है ज्यादा गर्मी – क्न्योकि हिंदुस्तान का तापमान पश्चिमी देशो की तुलना में बहुत अधिक है ! इस कारण पिंजरे जो लोहे या एल्युमुनियम के बने होते है बहुत ज्यादा गर्म हो जाते है ! आप जानते ही है गर्मी में बर्ड बहुत ज्यादा परेशान होता है जिस कारण मृत्यु दर काफी बढ़ जाती है !

2 ) बिजली की समस्या -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वंहा बिजली हो न हो फिर भी काम चल जाता है होनी तो वंहा पर भी चाहिए परन्तु  पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो वंहा पर बिजली का होना बहुत जरूरी है ! अगर बर्ड को आप ठंडक न दे पाए तो वंहा पर मृत्यु दर बहुत अधिक होने वाली है !

 

3 ) खाद निकलने में समस्या -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वंहा से खाद निकलना बहुत आसान होता है परन्तु पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो वंहा से खाद निकलने में बहुत दिक्कत होती है !

 

4 ) बर्ड को थकान  होना -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है वो आसानी से घूम – फिर सकते है परन्तु पिंजरे में पाले हुए बर्ड एक ही जगह रहकर हताश हो जाते है !जिसे  Cage Fatigue के नाम से जाना जाता है !

 

5 )शुरुआती खर्च बहुत ज्यादा -जो बर्ड जमीन पर पाले जाते है उनका शुरुवाती खर्च इतना ज्यादा नहीं होता परन्तु पिंजरे में आपने बर्ड पाले है तो शुरआती खर्च बहुत ज्यादा होता है !

इसके अलावा ब्रायलर को पिंजरो में पालने के नुक्सान के साथ- साथ फायदे भी है उन्हें भी आप जान लीजियेगा !- यहाँ क्लिक करें !

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पोल्ट्री में मृत्यु दर के कारण ! बचाव और सावधानियां ! Reason of 90% Mortality in Poultry Farming. Reason and Precaution .

पोल्ट्री की वायरल और बैक्टीरियल बीमारियॉं ! बचाव और सावधानियां !

आज का मुद्दा है पोल्ट्री की वायरल और बैक्टीरियल बीमारियॉं ! 

दो ऐसे कारण  है जिसकी वजह से पुरे संसार में पोल्ट्री फार्म पर मृत्यु दर 90 %  से अधिक होती है !

1 ) वायरल

2 ) बैक्टीरियल

होता क्या है कि फार्मर  इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते जिसकी वजह से बहुत भारी नुकसान उनको होता है !

1 ) वायरल –

एक कड़वा सच वायरल बीमारी का कोई इलाज ही नहीं है ! 

जैसे -रानीखेत, गुम्बारो ,इन्फलुजा  ये सभी वायरल कारणों में आते है ! वायरल आने के बाद और इनकी कोई दवा नहीं होती है बहुत सारे पोल्ट्री फार्मर  यह जानना चाहते हैं कि इन बीमारियों से कैसे बचा जाये ! केवल सुरक्षा ही इसका इलाज है आप अपने बर्ड को शुरूआत से ही ऐसा तैयार कीजिए कि उसकी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बहुत ज्यादा हो ! आप अपने बर्ड को शुरुआत से ही हर्बल चीजें दे सकते हैं जिस वजह से उनकी बीमारियों से लड़ने की या रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक हो जाती है! बहुत सारी कंपनियां हर्बल उपाय को लेकर  दवाई बनाती रहती हैं ! जल्द ही हम इसी पोस्ट में लिंक डाल देंगे ,आप सीधे कंपनियों से ही खरीद सकते है ! 

सावधानियां -Vaccination ही सिर्फ एकमात्र बचाव है ! 

Vaccination सावधानी से करें ! सिर्फ 2 घंटों में Vaccination ख़त्म हो जानी चाहिये ! Vaccine विश्वसनीय जगह से ही खरीदें  और Vaccine लाने के लिये ज्यादा बर्फ और गर्मी से बचाने वाले डब्बे में ही लायें ! लिफाफे में  Vaccine लाने से इसकी कार्यक्षमता ख़त्म हो सकती है !

2 ) बैक्टीरियल- जैसे – CRD ,CCRD ,इकोलाई ये सभी बैक्टीरियल कारणों  में आती है ,और इनकी दवाइंया  है  पर  इसमें सावधानी बरतनी  है उदाहरण के लिए जब बर्ड  किसी हैचरी से आपके पोल्ट्री फार्म पर आता है तो आप पहले दिन से लेकर पांचवें  दिन तक उसको एंटीबायटिक देते हैं वह एंटीबायोटिक इसलिए दिया जाता है कि हो सकता है कि जिस हैचरी से आपने बर्ड खरीदा है उसमें पहले से कोई इन्फेक्शन मौजूद हो परंतु आने वाले वक़्त में अगरजब बर्ड  को कोई प्रॉब्लम हो तोआप वही एंटीबायोटिक उसको दोबारा देंगे  वह एंटीबायोटिक काम नहीं करेगा क्योंकि वह आपने पहले ही दे दिया है और बर्ड का शरीर आदी हो जाता है ! इसलिए शुरुआत में आपने एंटीबायोटिक बिल्कुल ही लाइट देना है ताकि आगे जाकर आपको कोई दिक्कत ना हो !

 वायरस और बैक्टीरिया होते हैं यह अलग-अलग रूप में अलग-अलग तरीके से अपना काम करते हैं ! 

इसलिये हर बीमारी के लिये अलग एंटीबायोटिक और पोल्ट्री फार्म पर पुराने दिये एंटीबायोटिक के हिसाब से  ही इलाज करना ठीक रहता है !

   बैक्टीरिया  लाभ वाले भी होते हैं और हानिकारक भी होते हैं और वायरस पोल्ट्री फार्म पर तो बिल्कुल ही हानिकारक होते हैं इसलिए इन दोनों बीमारियों से बचने के लिए आपने शुरुआती दौर में ही अपने बर्ड  सही देखभाल दें ! पहले सात दिन तापमान बनाये रखें ! और कोशिश करिये पहले सात दिन खुद ही निगरानी रखें चाहे रात का ही वक़्त क्यों न हो !

 ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाए और  बीमारियों का उन पर कोई असर ना पड़े या कम पड़े  !

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जरूरी सूचना – नीचे या ऊपर दिये फेसबुक और Whatsup लिंक से ही अपने सभी फेसबुक और whatsup ग्रुप में शेयर करके सभी पौल्ट्री से जुड़े मित्रों का फायदा करना न भूलियेगा ! याद रखियेगा poultryindiatv.com . इस लेख से रेट बिना दिये फेसबुक और Whatsup लिंक शेयर लिंक से निकाल कर भेजना कॉपीराइट का उल्लंघन है और दंडनीय अपराध है !

 

छोटे स्तर पर मुर्गी पालन करने वालों के लिए जरूरी जानकारी ! Small Scale Poultry Tips Hindi .

छोटे स्तर पर मुर्गी पालन करने वालों के लिए जरूरी जानकारी ! ( Small Scale Poultry Farming )

आज का हमारा मुद्दा उन लोगों के लिए है जो छोटे स्तर पर मुर्गी पालन करते हैं

 

पोल्ट्री फार्म  पर जो लोग ड्रिंकर की जगह डिब्बे इस्तेमाल कर रहे हैं और ड्रिंकर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं और ऐसी गलतियां कर रहे हैं जिनकी वजह से उनकी एफ सी आर अच्छी नहीं आ रही है और अमोनिया गैस भी वहां पर ज्यादा बन रही है ! आज हम इस लेख के माध्यम से आपको जानकारी देने जा रहे हैं वह जानकारी पाने के बाद आपके पोल्ट्री फार्म पर ग्रोथ अच्छी हो जाएगी इसके अलावा बीमारियां आनी भी काफी कम हो जाएंगी !

 

 पोल्ट्री फार्म पर ड्रिंकर के बदले डिब्बों का इस्तेमाल हो रहा है तो वहां पर बीमारियां आने की गुंजाइश थोड़ी ज्यादा होती है क्योंकि अगर बर्ड छोटा है तो उस की चोंच पानी तक नहीं जा पाती और पानी पीने में उसे थोड़ा ज्यादा जोर लगाना पड़ता है इस से वह अच्छा महसूस नहीं करता और जितना पानी वह पीना चाहता है उतना पानी नहीं पी पाता मान लीजिए उसको 10 ग्राम या 20 ग्राम 100 ग्राम पानी पीना होता है तो वह है इसका आधा पानी भी नहीं पी पाता जिस कारण से पोल्ट्री फार्म पर गाउट आने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं ! और अगर बर्ड छोटा है या बड़ा है तो वह ग्रोथ सही नहीं ले पाएगा और कई बार देखने में आया है कि बर्ड बड़ा हो जाता है और ट्पो  में जब थोड़ा-थोड़ा पानी रह जाता है और पानी भरने में हम लेट हो जाते हैं तो उससे भी समस्या हो जाती है और जब पानी थोड़ा रह जाता है तो बर्ड उसके ऊपर बैठ बैठ जाता है जिससे टप पलट जाता है!  और उसमें जो मौजूद पानी होता है  वह जमीन पर गिर जाता है आपका जो लीटर है जो बिछावन है वह गीली हो जाता है ! अगर आप का बिछावन गीला हो गया तो वहां पर अमोनिया गैस ज्यादा बनने लगती है और इससे कार्बन डाइऑक्साइड या और भी बहुत सी ऐसी गैंसे  हैं जो पनपने लगती हैं और बर्ड की ग्रोथ को रोक देती है तो आपने पानी की व्यवस्था को अच्छे तरीके से हैंडल करना है इसके अलावा बदलते मौसम के साथ-साथ आपने पानी की टंकी को भी सुरक्षित रखना है क्योंकि बदलते मौसम में पानी की टंकी का पानी गर्म या ठंडा होता रहता है !

गर्मी में तो आप उसको लकड़ियों से या किसी बोरियों से ढक देते हैं तो इसी से पानी थोड़ा ठंडा रहता है लेकिन सर्दियों में भी आपने ऐसी व्यवस्था करनी है कि सर्दियों में पानी ज्यादा ठंडा ना हो और गुनगुना पानी बर्ड को मिले सर्दियों में आप उसको रात को तो बोरियों ढक दें ताकि पानी ज्यादा ठंडा ना हो और दिन में बोरियों को हटा दे ताकी धूप लगे और वह पानी हल्का हल्का गुनगुना हो जाए और सर्दियों में गुनगुना पानी बहुत बेहतर माना जाता है  क्योंकि बर्ड बहुत ज्यादा ठंडा पानी नहीं पीता अगर पानी कम पिएगा तो आप देखने की गाउट की समस्या तो आएगी ही आएगी साथ ही बीमारियां ज्यादा आएंगी बड़ की ग्रोथ अच्छे से नहीं हो पाएगी 

इसके अलावा यह जो देसी भाषा में जंगले होते हैं आप इनको कवर कह लीजिए बहुत सारे पोल्ट्री फार्मर टपो के  ऊपर इन जंगलों को लगा देते हैं!

कई बार बर्ड उल्टा होकर टप  के ऊपर बैठ जाता है और बीट टप  में चली जाती है अगर टप के ऊपर यह जंगले  लगे होंगे तो बर्ड की जो बीट है वह इसमें नहीं जाती!

क्योंकि गंदा पानी बर्ड  को पिलाना हानिकारक होता है !

उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी!

 

                                                बहुत-बहुत धन्यवाद

Chhtisagarh Poultry Important Information For Poultry .छत्तीसगढ़ के समस्त ओपन ब्रायलर फार्मर साथियों को जरूरी सूचना !

एक पैग़ाम ब्रायलर      फार्मर साथियों के नाम
————————————–
छत्तीसगढ़ के समस्त ओपन ब्रायलर फार्मर साथियों को मेरा सलाम  🙏🏻नमस्कार । साथियों हम और आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते, किस तरह से 3 महीने से भी कम समय  में एक एक तिनका जोड़ कर ये घोसला (CGBFA  / छत्तीसगढ़ ब्रायलर फार्मर एसोसिएशन) हम सब ने मिलकर बनाया है। और आगे भी बनाये रखेंगे। अवैवस्थित ओपन ब्रायलर फार्म व्यवसाय को संगठित होकर व्यवस्थित बनाने व कामयाबी और उन्नति की ओर ले जाने का जो सार्थक कदम , आप और हमने मिलकर बढ़ाया है। वो काबिले तारीफ़ है। बिखरे हुए मोती अब एक सूंदर व मज़बूत माला का रूप ले चुके हैं।
आप सभी जानते हैं हम सब ओपन ब्रायलर फार्मर,  चिक्स के महंगे दाम और उस अनुपात में तैयार “मुर्गा” के दाम  “कम” मिलने के कारण अपनी “पूंजी” अपना “व्यवसाय” यहाँ तक की अपना “अस्तित्व” खोने को मजबूर हो रहे हैं या मजबूर किये जा रहे हैं। इसके अलावा महंगी बिजली , फीड पर टैक्स , जैसी  कई समस्या से हम पीड़ित हैं।क्यों की अब हम संगठित हो चुके हैं।भटकाव से हटकर ,सही दिशा में काम करके अपने व्यवसाय को हानि से लाभ की ओर ले जा सकते हैं।
 चिक्स के बढे हुए दाम हमारी प्रमुख समस्या बनी हुई है, अब समय आ गया है के हम छत्तीसगढ़ के ओपन ब्रायलर फार्मर भी समय समय पर “ब्रायलर चिक्स प्लेसमेंट हॉलिडे” करें, और इस  बे लगाम होते चिक्स के दामों को काबू में करें। और समूचे भारत में भी ओपन ब्रायलर फार्मिंग कीे एकता और उन्नति के लिए मील का पत्थर साबित हों  और मिसाल बनें। ताके कई दूसरे राज्य जहाँ अभी इसकी शुरआत नहीं हुई हो। वहां भी फार्मर संगठित होकर इस तरह का काम करके अपने व्यवसाय को बचाएँ और रूपये कमाएं, जिसके लिए वो काम करते हैं।
CGBFA के सभी ज़िला एसोसिएशन से प्रस्तावित। एवं प्रदेश  एसोसिएशन  में पारित “प्रथम” 11 दिवसीय “ब्रायलर चिक्स प्लेसमेंट  हॉलिडे” का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। और प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मैं इस निर्णय की आधिकारिक घोषणा करता हूँ।

ब्रायलर चिक्स प्लेसमेंट हॉलिडे” 21 दिसम्बर 2017 से आरम्भ होकर 31 दिसम्बर 2017 की मध्यरात्रि तक समूचे छत्तीसगढ़ में  लागू रहेगा। न लोकल चिक्स न दूसरे राज्य का चिक्स याने की चूज़े की हमारे फार्म में 11 दिन की NO ENTRY है।
सहयोग और समर्थन की अपेक्षा के साथ।  🙏🏻  आपका साथी
एम.आसिम बेग
प्रदेश अध्यक्ष ( CGBFA )

जरूरी सूचना-लखनऊ मुर्गा मंडी समिति ,अवध पोल्ट्री आनर्स एसोसिऐशन और लखनऊ के सभी छोटे बडे किसानों की संयुक्त मीटिंग जरूरी सूचना !

जरूरी सूचना !

लखनऊ मुर्गा मंडी समिति , अवध पोल्ट्री आनर्स एसोसिऐशन और लखनऊ के सभी छोटे बडे किसानों की संयुक्त मीटिंग होटल विजय पैराडाइज़ में सफलता पूर्वक संपन्न हुई |

मीटिंग में सर्वसहमति से जो बातें तय की गईं वह इस प्रकार हैं :-

1. लखनऊ मुर्गा मंडी समिति किसानों की सहमति से डेली आढत का रेट ओपेन करेगी | रेट के लिये एक वाट्सएप ग्रुप बनाया जायेगा जिसमें 6 किसान और 6 आढतदारों को रखा जायेगा ताकि आपसी तालमेल से सही रेट ओपेन किया जा सके |

2. जो रेट लखनऊ मुर्गा मंडी समिति ओपेन करेगी उसके अलावा लखनऊ में दूसरा कोई रेट ओपेन नहीं किया जायेगा |

3. लखनऊ मुर्गा मंडी समिति द्वारा ओपेन किये गये रेट से किसान को जो डिस्काउन्ट आढतदार को देना है वह इस प्रकार है :-

• आढत से 35 किलोमीटर की दूरी तक किसान आढत रेट से 10% डिस्काउनट पर माल आढतदार को देगा |

• आढत से 36 कि.मी.से 70 कि. मी. की दूरी के फार्मर को 10% डिस्काउन्ट + 1 ₹ किराया आढतदार को देना होगा |

• आढत से 71 कि. मी. की से ज्यादह दूरी के फार्मर को 10% डिस्काउन्ट + 2 ₹ किराया आढतदार को देना होगा |

4. किसान के माल का पेमेन्ट आढतदार को छटे दिन करना होगा |

5. किसान उधार दिये जाने वाले माल के अगेन्स्ट अगर माल देते समय चेक लेना चाहता है तो वह आढतदार से चेक ले सकता है |

6. लखनऊ मुर्गा मंडी समिति अपने सदस्यों की एक लिस्ट जारी करेगी जिसमे इस बात की जानकारी दी जायेगी कि किसान किन लोगों को माल दे सकता है | उन लोगों के पास अगर किसान का पैसा फंसता है तो समिति उन लोगों पर कार्यवाही में किसानों का साथ देगी और किसानों के साथ तय की गई अपनी भूमिका को निभाएगी |

7. दुकान पर तौल कर माल बेचने वाले आढतदारों को कोई भी किसान माल नहीं देगा | ऐसे लोगों को जो दुकान पर तौल कर माल बेचते हैं उनका पूरी तरह से बहिष्कार किया जायेगा और किसान और आढतदार दोनों मिल कर दुकान पर तौल कर माल बेचने वाले पर अंकुश लगायेंगे | ये खबर आप यूट्यूब  Poultry India TV पर सुन भी सकते है !

धन्यवाद

मो० रज़ा (माना)
सचिव
लखनऊ मुर्गा मंडी समिति

मुर्गियों में सफेद दस्त का कारण और समाधान ! White Diarrhea In Broiler.

          मुर्गियों में सफेद दस्त का कारण और समाधान ! White Diarrhea In Broiler.

  नमस्कार दोस्तों आज का मुद्दा है मुर्गियों में सफेद बीट का कारण और समाधान !

   मुर्गियों की सफेद आ रही हैं तो आप यह समझ लीजिए कि मुर्गी फीड जो खाती रहेगी वजन नहीं देगी ! मतलब बेहतर नहीं आएगी ! यही अगर अंडे देने वाली मुर्गी में अगर यह समस्या आएगी तो आप जान लीजिए की प्रोडक्शन  सही होने वाली नहीं है !

       आप अगर कारण जानते  हैं ,  तो समाधान भी अच्छे तरीके से कर सकते हैं ! मुर्गी के  शरीर में बाइल नाम का तरल पदार्थ बनता है ! जो लीवर से निकलता है या आप यूं कह ले ली वही इसको बनाता है !और यह गोल ब्लैडर में इकट्ठा होता रहता है ! इसका मुख्य काम है , भोजन को पचाना !

  यह बाइल मुर्गी के के शरीर में बेहतर बनता रहेगा तो तो उसकी बीच हल्के भूरे रंग की आएगी ! आप यह समझ लीजिए कि ब्रायलर की FCR बेहतर आएगी या मुर्गी की प्रोडक्शन अच्छी आती रहेगी !

   और ब्रायलर बेहतर वजन तथा लेयर लंबे समय तक अंडे अच्छे द्वारा में देती रहेगी  !

          दरअसल बाइल को आप यह समझ लीजिए कि भोजन को पचाने वाला एंजाइम या भोजन को पचाने में मदद करने वाले केमिकल इन का  मिश्रण आप  कह लें !

 अगर यह बायलर मुर्गी के शरीर में नहीं बनेगा या कम बनेगा तो मुर्गी की बीट का रंग हल्का होना शुरू हो जाएगा यह इंसानों पर भी लागू होती है !

              ध्यान रखे कि बाईल बनता कहाँ है ? यह  बनता है लीवर के द्वारा ! !

   इसका मतलब लीवर की कार्य क्षमता कमजोर हो गई है !

       तो आप सफेद बीट  को ठीक करना है तो इसका मतलब बाइल को ठीक करना है ! बाइल को ठीक करने का मतलब लीवर की कार्य क्षमता को ठीक करना !

 दवायें  देने से पहले आप यह सब से पहले ध्यान रखें कि आप को पानी और फीड की गुणवत्ता को ध्यान रखना है क्योंकि फीड की गुणवत्ता अगर ठीक नहीं है,  मुर्गियों की  फीड में फंगस ज्यादा है !

Poultry Feed

या टॉक्सिंस ज्यादा हैं !  आप जितनी मर्जी दवाई देते रहे उससे कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला !

   समस्या वही की वही रहने वाली है और पानी आप जो अपनी मुर्गियों को दे रहे हैं उस पानी में अगर समस्याएं रहेंगी उस में वायरल या बैक्टीरियल  लोड अधिक हो तो भी आपके मुर्गियों को कोई भी फर्क पड़ने वाला नहीं है किसी भी तरह की अच्छी-अच्छी दवाइयां भी आप देते रहें !

           अगर यह समस्या आ ही गयी है तो इसका समाधान क्या करें ! आप के पोल्ट्री फार्म पर  सफ़ेद बीट आये तुरंत लिवर टॉनिक को शुरू कर दीजिए ! जो आपने लिवर टॉनिक देना है वह दे दो तरह के देने हैं कम से कम पहले 3 दिन सिंथेटिक और हर्बल दोनों !आप डॉक्टर की सलाह लेकर यह दोनों दे दीजिए !

                 बाद में चाहे कोई भी एक तरह का लिवर टॉनिक दे सकते है ! कम से कम 7 दिन जरूर दें ! ज्यादा भी दे सकते है ! एक बात कभी भी ना भूलें , अच्छी कंपनी का ही लिवर टॉनिक हो ! इससे आपको रिजल्ट अच्छे मिलेंगे !

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Poultry Farming On Roof in Hindi.घर में या छत पर पोल्ट्री फार्म बनाने से पहले जरूरी जानकारी !

                                    छत पर पोल्ट्री फार्म बनाने से पहले जरूरी जानकारी !

  कुछ किसान जानना चाहते हैं कि छोटे स्तर से वह अपने अपनी घर की छत से कैसे पोल्ट्री फार्मिंग शुरू कर सकते हैं और कौन-कौन सी जरूरी बातें हैं जो उनको ध्यान में रखनी होगी और तो आज हम किसी के बारे में आपको बताएंगे !

     सबसे पहले तो हम आपको बता दें कि जहां पर भी आप पोल्ट्री फार्म बनाने जा रहे हैं वह पोल्ट्री फार्म रिहायशी इलाके से दूर हो !

क्योंकि सरकार ने यह आदेश दिया है कि आपका पोल्ट्री फार्म रिहायशी इलाकों के पास में नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे जो अमोनिया गैस निकलती हैं वह रिहायशी इलाकों में ना जाए साथ ही मुर्गियों का शोरगुल भी रिहायशी इलाके हो डिस्टर्ब ना करें !

       दूसरा जो लेयर फार्म (अंडा उत्पादन के लिये बनाया पोल्ट्री फार्म !) है जो  है वहां पर मक्खियों की समस्या बहुत ज्यादा हो जाती है तो सरकार ने इसके बारे में कहा है कि आप अपने फार्म पर मक्खियों का निवारण कीजिए ताकि यह  रिहायशी इलाकों में जाकर वहां पर बीमारियां ना फैलाएं !

         ब्रायलर फार्मिंग और लेयर फार्मिंग दोनों ही आप छत पर बना सकते हैं ! रिहायशी इलाके छत पर आप दोनों का ही पोल्ट्री फार्म बना सकते हैं अगर आप उसे 50-100 बर्ड तक रखना चाहते हैं, तब तो ठीक है अगर आप उसको सोच रहे हैं कि  बड़े स्तर पर करें तो यह संभव नहीं होगा क्योंकि ब्रायलर फार्मिंग में आज नहीं तो कल अगर आप उस को बढ़ाएंगे तो अमोनिया गैस की गंध ,गंदगी और लेयर फार्मिंग के कारण मक्खियों का  ज्यादा पैदा होना !

       वैसे तो किसी को कोई एतराज नहीं होता पर कई दफा इन सभी कारणों की वजह से कोई आपकी शिकायत कर देता है तो आप मुसीबत में फंस सकते हैं !

           इसके अलावा आप जो देसी मुर्गियां है ! 50-100 तक रख सकते हैं !

अपने घर की छत पर उनका खाने की व्यवस्था कर सकते हैं !और उनके अंडे रखने की व्यवस्था कर सकते हैं अगर किसी को ऐतराज न हो ! पोल्ट्री से जुडी अन्य जानकारियों या पोल्ट्री के रोज के रेट जानने के लिये poultryindiatv.com  पर या यूट्यूब पर Poultry India TV सर्च करके भी ले सकते है !

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सर्दियों में मुर्गी पालन ! Poultry Farming Tips In Winter ! ( Hindi )

ठण्ड के मौसम में विशेष तौर पर ध्यान रखने वाली बातें !
1- सही तापमान- पहले सप्ताह में 90-95 डिग्री फ़ारेनहाइट , दुसरे सप्ताह में 90 डिग्री फ़ारेनहाइट उसके बाद 85 डिग्री फ़ारेनहाइट रखने का प्रावधान है !

      यदि दिन के समय पर्दे खोलने हो तो  सूरज की दिशा में खोले ! ऊंचाई से थोड़ा पर्दा खोले, ताकि सीधी हवा चूजों पर ना पड़े !  शुरुवाती दिनों में साइड से परदे हटाना उचित नहीं  होता , तो फ़ार्म की लंबाई वाली खाली पड़ी एरिया से हवा ली जा सकती है,और एक्सहॉस्ट फैन का उपयोग किया जा सकता है।
      चाहे दिन हो या रात, एक समान तापमान महत्वपूर्ण है,  तापमान को नियंत्रित करने के लिए दोहरे पर्दो का इस्तेमाल  कर सकते हैं, परन्तु ध्यान रखिये !  वेंटिलेशन का ध्यान रखना जरूरी है। नहीं तो  ascites आने मतलब पेट में पानी भरने की समस्या आ सकती है !
2 – सही नमी ( Humidity ) –  Humidity लगभग 60 के आसपास हो। याद रहे यदि ह्यूमिडिटी इससे ज्यादा है, तो ये मानक उचित तापमान की बजाय अधिक तापमान करवा देंगे।
3) ताज़ी हवा का संचार ताकि दूषित गैस का सही निकास हो !और ठंडी हवा के झोंको पर रोक !
4  -पानी का सही तापमान बनाये रखने के लिये गर्म पानी को मिलाना ताकि चूज़े को जो पानी पिलायें वो बहुत ठंडा ना हो ! बहुत ठन्डे पानी से शरीर की गर्मी का नुकसान होगा ! जिससे सही ग्रोथ कभी नहीं मिल सकती ! और चूज़े के कम पानी पीने से Gout आने की सम्भावना बढ़ जायेगी !
5 – चूज़े को साफ़ पानी ही दें ! और पानी के बर्तन रोज़ धोयें !
6 – शुरुवात में जगह प्रति चूज़ा। .20 से  .25 Square Feet जरूर दें ! फिर धीरे धीरे बढ़ायें !
7 -पर्याप्त  तथा सामान रोशनी दें !
8  – वायरल बीमारियों से बचने को वैक्सीनेशन जरूर करें और अत्यंत सावधानी से !
9 -शुरुवात के कुछ दिन पोल्ट्री फार्म पर ही गुजारें ! ताकि तापमान या अन्य किसी गड़बड़ी को तुरंत सही किया जा सके !
10 – चूज़े आने से पहले ही तैयारी पूरी हो जानी चाहिये ! बिछावन कम से कम इंच जरूर रखें ! और तापमान ज़मीन से लेना है ,नाकि ऊंचाई से !
अपने पोल्ट्री फार्म पर उपरोक्त बातों को गंभीरता से लें ! और लोगों के फायदे के लिये पोस्ट शेयर करना न भूलियेगा !

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Daily Broiler & Egg Price.